राहुल गांधी को अमित शाह की चुनौती, बोले- हिम्मत है तो संसद में आकर चर्चा करें

करनाल। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को हरियाणा के करनाल में भारतीय जनता पार्टी की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के समापन समारोह में कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें चर्चा करने का साहस है तो वे संसद में आकर मुद्दों पर बहस करें। शाह ने यह भी कहा कि एसआईआर प्रक्रिया पर चर्चा के लिए सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है।
अमित शाह ने कहा कि 22 अक्टूबर से 5 नवंबर तक देशभर के प्रमुख स्थानों पर आयोजित पदयात्राओं में भाजपा कार्यकर्ताओं और आम लोगों का उत्साह देखने को मिला। उन्होंने दावा किया कि 2024 में लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और इसके बाद हुए विभिन्न चुनावों में जनता ने कांग्रेस और राहुल गांधी के नेतृत्व को नकारा है। उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के चुनावी परिणामों का उल्लेख करते हुए भाजपा की राजनीतिक उपलब्धियां गिनाईं।
शाह ने संसद की कार्यवाही को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में संसद चर्चा का सर्वोच्च मंच है, लेकिन कांग्रेस संसद में चर्चा करने के बजाय हंगामा और बहिष्कार करती है। उन्होंने कहा कि देश की समस्याओं, कानून निर्माण और जनकल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा सड़कों पर नहीं, बल्कि संसद में होनी चाहिए। राहुल गांधी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि उन्हें सड़क पर चर्चा करने का शौक है तो वे हरियाणा के किसी चौराहे का स्थान बता दें, भाजपा युवा मोर्चा का अध्यक्ष उनसे चर्चा करने पहुंच जाएगा।
गृह मंत्री ने राहुल गांधी पर चुनावी हार का ठीकरा चुनाव आयोग और एसआईआर प्रक्रिया पर फोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल किया कि 2014 और 2019 में एसआईआर नहीं थी, तब भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। उनके मुताबिक 2024 में भी एसआईआर नहीं थी, इसके बावजूद कांग्रेस चुनाव नहीं जीत सकी। शाह ने कहा कि राहुल गांधी को एसआईआर पर चर्चा करनी है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखें। सरकार इस विषय पर संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए तैयार है।
अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में बनाए रखने के लिए एसआईआर का विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा का संकल्प घुसपैठियों की पहचान कर उनके नाम मतदाता सूची से हटाने और उन्हें देश से बाहर करने का है। उन्होंने कांग्रेस की रैली को ‘घुसपैठियों को बचाने की रैली’ बताते हुए उसकी आलोचना की।
शाह ने कांग्रेस की रैली में भीड़ को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 10 लाख लोगों को जुटाने का आह्वान किया गया था, जबकि मैदान की क्षमता करीब 70 हजार थी और वह भी आधा खाली रहा। उन्होंने 1 नवंबर को रैली आयोजित करने के फैसले पर भी कांग्रेस को घेरा और 1984 के सिख दंगों का जिक्र करते हुए कांग्रेस से अपने पुराने रिकॉर्ड पर जवाब देने की बात कही।
कांग्रेस के राजनीतिक प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि 2007 में राहुल गांधी के महासचिव बनने के समय कांग्रेस के करीब 1200 विधायक थे। उनके उपाध्यक्ष और फिर अध्यक्ष बनने के दौरान यह संख्या घटती गई। शाह ने दावा किया कि भारत जोड़ो यात्रा के समय तक कांग्रेस के विधायकों की संख्या करीब 600 रह गई थी। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस की चुनावी स्थिति की तुलना करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा के विधायक और सांसद बढ़े हैं, जबकि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के विधायकों की संख्या लगातार कम हुई है।
अमित शाह के इस संबोधन में संसद में चर्चा, एसआईआर प्रक्रिया, घुसपैठ और कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।













