2040 तक 6G से वैश्विक अर्थव्यवस्था को 1.24 ट्रिलियन डॉलर का लाभ, स्पेक्ट्रम की कमी से 520 अरब डॉलर गंवाने का खतरा

नई दिल्ली। मोबाइल नेटवर्क की छठी पीढ़ी यानी 6G तकनीक आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकती है। जीएसएमए की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 6G नेटवर्क से वर्ष 2040 तक दुनिया की अर्थव्यवस्था में 1.24 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त योगदान मिलने का अनुमान है। हालांकि, इसके लिए जरूरी रेडियो स्पेक्ट्रम उपलब्ध नहीं कराया गया तो इस संभावित आर्थिक लाभ का करीब 42 प्रतिशत यानी 520 अरब डॉलर हिस्सा गंवाना पड़ सकता है। रिपोर्ट में सरकारों से 2030 तक अतिरिक्त मिड-बैंड स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराने की अपील की गई है।
वैश्विक जीडीपी में 0.7 प्रतिशत योगदान का अनुमान
जीएसएमए के आकलन के अनुसार, 6G तकनीक वर्ष 2040 तक वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 0.7 प्रतिशत के बराबर योगदान दे सकती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), औद्योगिक ऑटोमेशन, इमर्सिव डिजिटल सेवाओं और अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी से इस आर्थिक वृद्धि को गति मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पर्याप्त स्पेक्ट्रम नहीं मिलने पर 6G नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार प्रभावित हो सकता है। इससे अनुमानित 1.24 ट्रिलियन डॉलर के आर्थिक लाभ में से 520 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। जीएसएमए के चीफ रेगुलेटरी ऑफिसर जॉन गिउस्टी के मुताबिक, आने वाले वर्षों में स्पेक्ट्रम नीति को लेकर लिए जाने वाले फैसले तय करेंगे कि 6G की आर्थिक क्षमता का कितना लाभ हासिल किया जा सकेगा।
मैन्युफैक्चरिंग और वित्तीय सेवाओं को सबसे अधिक फायदा
रिपोर्ट के अनुसार, 6G तकनीक से सबसे अधिक लाभ मैन्युफैक्चरिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र को मिलने की संभावना है। अनुमानित आर्थिक योगदान में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत और वित्तीय सेवाओं की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत रह सकती है। इसके अलावा निर्माण क्षेत्र का योगदान 13 प्रतिशत और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) क्षेत्र का योगदान 12 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
औद्योगिक रोबोटिक्स, एआई आधारित कनेक्टिविटी और आधुनिक डिजिटल सेवाएं इन क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इससे उत्पादन प्रक्रियाओं को अधिक स्वचालित बनाने और वित्तीय सेवाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी।
एआई और सैटेलाइट कनेक्टिविटी से बदलेगा नेटवर्क
जीएसएमए के मुताबिक, 6G नेटवर्क को शुरुआत से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्षमताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा। इससे नेटवर्क केवल डेटा ट्रांसफर तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जरूरत के अनुसार निर्णय लेने और इंटेलिजेंट नेटवर्क मैनेजमेंट जैसी सुविधाओं से लैस हो सकेंगे।
6G में इंटीग्रेटेड सेंसिंग तकनीक, औद्योगिक रोबोटिक्स, एडवांस्ड ब्रॉडबैंड सेवाओं और सैटेलाइट कनेक्टिविटी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे जमीन पर मौजूद मोबाइल नेटवर्क और उपग्रह आधारित सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
आर्थिक लाभ के लिए मिड-बैंड स्पेक्ट्रम अहम
रिपोर्ट में मिड-बैंड स्पेक्ट्रम को 6G के आर्थिक लाभ का प्रमुख आधार बताया गया है। अनुमान है कि 6G से होने वाले कुल आर्थिक योगदान में मिड-बैंड स्पेक्ट्रम की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत हो सकती है। वहीं, लो-बैंड स्पेक्ट्रम का योगदान लगभग 25 प्रतिशत रहने का अनुमान है। लो-बैंड स्पेक्ट्रम ग्रामीण क्षेत्रों, इमारतों के अंदर और सीमित नेटवर्क कवरेज वाले इलाकों तक कनेक्टिविटी पहुंचाने में मददगार हो सकता है।
2030 तक अतिरिक्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराने की मांग
6G के संभावित लाभ हासिल करने के लिए जीएसएमए ने सरकारों से वर्ष 2030 तक कम से कम 2 गीगाहर्ट्ज अतिरिक्त मिड-बैंड स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराने की अपील की है। इसमें अपर 6 गीगाहर्ट्ज रेंज के कुछ हिस्सों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही 600 मेगाहर्ट्ज बैंड उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है, ताकि नेटवर्क कवरेज बेहतर हो और अधिक कनेक्टेड डिवाइस को सेवा दी जा सके।
दूरसंचार उद्योग संगठन ने नियामकों से स्पष्ट राष्ट्रीय स्पेक्ट्रम रोडमैप तैयार करने की भी अपील की है। इससे दूरसंचार कंपनियों को भविष्य के नेटवर्क विस्तार और निवेश की योजना बनाने में निश्चितता मिल सकेगी।
2027 में स्पेक्ट्रम आवंटन पर अहम चर्चा
यह रिपोर्ट वर्ष 2027 में होने वाले वर्ल्ड रेडियो कम्युनिकेशन कॉन्फ्रेंस (डब्ल्यूआरसी) से पहले आई है। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उभरती तकनीकों के लिए भविष्य के स्पेक्ट्रम आवंटन पर महत्वपूर्ण चर्चा और फैसले होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, 6G को भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का अहम आधार माना जा रहा है। हालांकि, इसकी सफलता केवल तकनीकी विकास पर निर्भर नहीं करेगी। पर्याप्त स्पेक्ट्रम, स्पष्ट सरकारी नीतियां और दूरसंचार क्षेत्र में समय पर निवेश भी यह तय करेंगे कि 6G से मिलने वाले संभावित आर्थिक लाभ को कितनी हद तक वास्तविकता में बदला जा सकेगा।













