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धनतेरस की रात गाजी नगर की झुग्गी बस्ती में भीषण आग, 50 झोपड़ियां जलकर राख; कई परिवार बेघर

 

जबलपुर। धनतेरस की रात गोहलपुर थाना क्षेत्र के गाजी नगर झुग्गी बस्ती में भीषण आग लगने से करीब 50 झोपड़ियां जलकर खाक हो गईं। रात करीब 2 बजे लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और एक के बाद एक झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया। आग बुझाने के लिए 13 दमकल वाहन रातभर जुटे रहे। सुबह तक आग पर काबू पाया जा सका। हादसे में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई, लेकिन कई परिवारों का आशियाना और घर-गृहस्थी का सामान पूरी तरह तबाह हो गया।

लेमा गार्डन के पास गाजी नगर मैदान में करीब 350 झुग्गियां हैं। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि आसपास की झोपड़ियां भी इसकी चपेट में आती चली गईं। सूचना मिलते ही पुलिस, नगर निगम, बिजली कंपनी और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल वाहनों और टैंकरों में पानी खत्म होने पर उन्हें दोबारा भरकर घटनास्थल भेजा जाता रहा। एहतियात के तौर पर बिजली कंपनी ने इलाके की विद्युत आपूर्ति भी बंद कर दी थी। सुबह तक आग पूरी तरह बुझा दी गई।

50 साल की मेहनत एक रात में राख

अपनी झोपड़ी गंवाने वाली शबनम ने बताया कि रात में लोगों ने आवाज लगाकर आग लगने की सूचना दी। जब वह बाहर निकलीं तो चारों तरफ आग फैली हुई थी। देखते ही देखते उनकी झोपड़ी भी जलकर राख हो गई। घर में रखा अनाज, नकदी, मोबाइल और रोजमर्रा का सामान कुछ भी नहीं बचा। उन्होंने बताया कि वह पिछले 50 साल से यहां रह रही थीं। इतने वर्षों की मेहनत से जुटाई गृहस्थी एक ही रात में खत्म हो गई। अब परिवार के रहने और खाने-पीने की व्यवस्था को लेकर चिंता बनी हुई है।

पूर्व पार्षद ताहिर अली ने बताया कि उन्हें रात करीब 2:30 बजे आग लगने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचकर उन्होंने नगर निगम और पुलिस को जानकारी दी। उन्होंने शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताते हुए कहा कि बस्ती में पहले भी कई बार आग की घटनाएं हो चुकी हैं।

सीएसपी अखिलेश गौर के अनुसार, पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और नगर निगम की दमकल टीम राहत एवं बचाव कार्य में जुटी रही। शुरुआती जानकारी में 30 से 35 परिवारों के प्रभावित होने की बात सामने आई थी। आग पूरी तरह बुझने के बाद नुकसान का वास्तविक आकलन किया जा रहा है। नगर निगम के मुताबिक, आग लगने की प्रारंभिक वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

खुले आसमान के नीचे परिवार, पुनर्वास की चिंता

आग में घर गंवाने वाले परिवार फिलहाल खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। आसपास के लोगों, परिचितों और रिश्तेदारों के सहारे उनकी रात गुजर रही है। स्थानीय पार्षद और अन्य नेताओं ने पीड़ित परिवारों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था करने की बात कही है। हालांकि, उनके स्थायी आश्रय और पुनर्वास को लेकर अभी ठोस व्यवस्था सामने नहीं आई है। आग में किसी की जान तो नहीं गई, लेकिन कई परिवारों की पूरी गृहस्थी उजड़ गई।

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