बर्दी छात्रावास में बच्चों की थाली से ‘पोषण’ गायब! अधीक्षक पर गंभीर आरोप, छात्रों ने कहा – मीनू सिर्फ कागजों में
छात्रों का आरोप - मीनू के मुताबिक नहीं मिलता भोजन; अधीक्षक पर छात्रों से गाली गलौज के भी आरोप जांच की मांग

सिंगरौली/ जिले के चितरंगी तहसील अंतर्गत संचालित राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह शासकीय बालक छात्रावास बर्दी की व्यवस्थाओं को लेकर छात्रों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रावास में रहने वाले बच्चों का आरोप है कि अधीक्षक संजय गुप्ता के पद संभालने के बाद से उन्हें मीनू के मुताबिक भोजन और अन्य सामग्री नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो रही है।
छात्रों ने आरोप लगाया कि भोजन में चावल, दाल, सब्जी और रोटी तो मिलती है, लेकिन दाल इतनी पतली होती है कि उसमें दाल कम और पानी ज्यादा नजर आता है। इसी तरह सब्जी में भी पानी की मात्रा अधिक होने का आरोप छात्रों ने लगाया है। छात्रों का कहना है कि भोजन की गुणवत्ता ऐसी है कि कई बार वे छात्रावास में खाना खाने के बजाय घर जाकर भोजन करने को मजबूर होते हैं।
‘मीनू’ में दर्ज सामग्री का थाली में नहीं दिखता अता-पता
छात्रों के मुताबिक छात्रावास के मीनू में शाम के समय भुना चना, तला चना और मुरमुरे जैसी सामग्री दिए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा सप्ताह में विशेष डाइट का भी प्रावधान बताया गया है। लेकिन छात्रों का आरोप है कि इनमें से कई सामग्री छात्रावास में दिखाई ही नहीं देतीं।
बच्चों का कहना है कि मीनू के अनुसार भोजन और नाश्ता मिलना चाहिए, लेकिन वास्तविकता में उन्हें निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
अधीक्षक पर अभद्र व्यवहार का भी आरोप
मामले को लेकर छात्रों ने अधीक्षक संजय गुप्ता पर गाली-गलौज करने का भी आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि शिकायत या भोजन की व्यवस्था को लेकर सवाल करने पर उनके साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जाता है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
‘पैसा नहीं आ रहा, जेब से खिला रहे हैं खाना’छात्रों के मुताबिक अधीक्षक का जवाब
छात्रों ने दावा किया कि जब उन्होंने भोजन की व्यवस्था को लेकर अधीक्षक से सवाल किया तो कथित तौर पर उन्हें जवाब दिया गया कि पैसा नहीं आ रहा है और वे अपनी जेब से खर्च करके बच्चों को खाना खिला रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि छात्रावास के लिए निर्धारित राशि या खाद्यान्न उपलब्ध नहीं हो रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? और यदि राशि उपलब्ध हो रही है, तो मीनू के अनुसार भोजन और सामग्री छात्रों तक क्यों नहीं पहुंच रही?
बच्चों की थाली का हिसाब कौन देगा
छात्रावास में रहने वाले बच्चे किसी निजी संस्था के नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था के भरोसे रहने वाले विद्यार्थी हैं। ऐसे में उनके भोजन की गुणवत्ता और निर्धारित मीनू के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर विषय है।
मामले में अब वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा छात्रावास का औचक निरीक्षण कर स्टॉक रजिस्टर, खाद्यान्न की उपलब्धता, खरीद-बिल, भोजन के मीनू और छात्रों को वास्तव में उपलब्ध कराई जा रही सामग्री का मिलान कराया जाना जरूरी है।
साथ ही छात्रों द्वारा लगाए गए अभद्र व्यवहार के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब निगाहें विभागीय जांच पर- क्या छात्रों की थाली का सच सामने आएगा
छात्रों के आरोपों ने छात्रावास की भोजन व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराता है या फिर बच्चों की शिकायतें भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाती हैं।












