बिना मुआवज़ा दिए जबरन घर उजाड़ने का आरोप — अमिलिया क्षेत्र के विस्थापितों ने बिरला कोल माइंस कंपनी पर लगाया गंभीर आरोप

सिंगरौली। अमिलिया क्षेत्र में टीएचडीसी बिरला कोल माइंस कंपनी द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर विस्थापितों में गहरा रोष है। विस्थापित परिवार के सदस्य राकेश पटेल ने आरोप लगाया कि कंपनी ने अब तक न कोई मुआवज़ा दिया और न ही कोई आधिकारिक नोटिस जारी किया, इसके बावजूद पुलिस बल की मौजूदगी में उनके घर को तोड़ दिया गया। इतना ही नहीं, जमीन पर लगे पेड़-पौधों को भी पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। पीड़ितों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह अवैध और एकतरफा है। राकेश पटेल ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन भी मौके पर मौजूद था, लेकिन उसने न पीड़ितों की बात सुनी और न ही किसी प्रकार की राहत प्रदान की। इसके बजाय, प्रशासन ने कंपनी के पक्ष में कार्रवाई को आगे बढ़ाया, जिससे विस्थापित परिवारों में आक्रोश व्याप्त है।
विस्थापितों का कहना है कि उन्हें जबरन हटाया जा रहा है, जबकि पुनर्वास, मुआवज़ा और कानूनी प्रक्रिया से संबंधित कोई भी कार्य पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने मांग की है कि जब तक सभी वैधानिक प्रक्रियाएं एवं मुआवज़े का प्रावधान पूरा नहीं होता, तब तक ऐसी कार्रवाई तत्काल रोकी जाए।
इस मामले में जब टीएचडीसी के उप महाप्रबंधक ए.के. शर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विषय बिरला कंपनी के कार्यक्षेत्र से संबंधित है और वही इसकी जिम्मेदार है।











