सुप्रीम कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति पर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सरकारी संस्थानों में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण और स्पष्ट फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मृत कर्मचारी के आश्रित को एक बार अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिल जाने के बाद वह उसी आधार पर किसी उच्च पद पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने यह भी साफ किया कि अनुकंपा नियुक्ति को पदोन्नति या स्थायी अधिकार के रूप में नहीं देखा जा सकता।
न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य केवल यह है कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसका परिवार तत्काल आर्थिक संकट से उबर सके। यह व्यवस्था मानवीय आधार पर दी जाने वाली राहत है, न कि सेवा में आगे बढ़ने या बेहतर पद पाने का माध्यम।अदालत ने यह तर्क भी खारिज कर दिया कि यदि आश्रित व्यक्ति बाद में उच्च शैक्षणिक योग्यता हासिल कर ले, तो वह ऊंचे पद का हकदार हो सकता है। पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल योग्यता के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति को पदोन्नति में नहीं बदला जा सकता। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समान अवसर के सिद्धांत का उल्लंघन होगा, क्योंकि इससे सामान्य भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होगी।
यह फैसला तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर दो याचिकाओं पर सुनाया गया। इन याचिकाओं में मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें सफाईकर्मी के रूप में नियुक्त दो कर्मचारियों को जूनियर असिस्टेंट के पद पर नियुक्त करने के निर्देश दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को असंगत मानते हुए रद्द कर दिया।इस फैसले को अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में एक अहम नजीर माना जा रहा है।













