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झंडेवालान मंदिर ध्वस्तीकरण पर देश-विदेश में रोष,चंडीगढ़ में शांतिपूर्वक रोष व्यक्त किया, सभी धर्मों के लोग हुए शामिल

मनोज शर्मा,चंडीगढ़। दिल्ली के झंडेवालान स्थित करीब 1400 वर्ष पुराने ऐतिहासिक एवं पौराणिक हर श्री नाथ जी मंदिर (बाबा श्री पीर रतननाथ जी) परिसर में गत 29 नवंबर को डीडीए व एमसीडी द्वारा की गई संयुक्त तोड़फोड़ की कार्रवाई को लेकर देश-विदेश में बसे बाबा श्री रतननाथ जी के अनुयायियों में भारी रोष व्याप्त है। इस रोष के विरोध में भारत सहित विदेशों के कई शहरों में शांतिपूर्ण पदयात्रा व रोष मार्च निकाले जा रहे हैं, जिनमें सभी धर्मों व समुदायों के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

इसी क्रम में चंडीगढ़ में भी बुधवार, 17 दिसंबर को बाबा श्री रतननाथ जी के अनुयायियों ने शांतिपूर्वक रोष व्यक्त किया। चंडीगढ़ का हर श्री नाथ जी मंदिर गांव किशनगढ़ में स्थित है, जिससे ट्राइसिटी के हजारों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है।हर श्री नाथ जी मंदिर,चंडीगढ़ के प्रधान सुरेंद्र कुमार चोपड़ा ने बताया कि देश की राजधानी दिल्ली के झंडेवालान में स्थित हर श्री नाथ जी मंदिर पिछले 80 वर्षों से अस्तित्व में है और इसकी परंपरा लगभग 1400 वर्षों पुरानी नाथ-गोरखनाथ परंपरा से जुड़ी मानी जाती है। उन्होंने कहा कि बुलडोजर से ध्वस्तीकरण के बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था व उत्साह में कोई कमी नहीं आई है।

उन्होंने इसे विडंबना बताते हुए कहा कि पाकिस्तान में वर्षों बाद भी मंदिर सुरक्षित हैं और वहां श्रद्धालुओं की सुविधाओं का ध्यान रखा जाता है,जबकि भारत में सरकार मंदिर परिसर को संरक्षण देने में विफल रही।श्रद्धालुओं के अनुसार कार्रवाई के दौरान तुलसी वाटिका, लंगर स्थल और कुछ अन्य निर्माण तोड़े गए, जिससे भक्तों में गहरी नाराजगी है। सेवकों ने बताया कि यहां पिछले 16 वर्षों से अखंड राम नाम ज्योति, हरे राम पाठ,दैनिक पूजन व लंगर सेवा निरंतर चल रही थी और आगे भी जारी रहेगी। मंदिर में प्रतिदिन प्रातः आरती,सत्संग और राम नाम जाप होता है,जहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर प्रबंधन वर्षों से लंगर,जल सेवा,गरीबों को कंबल वितरण,मेडिकल शिविर और गौशाला जैसी सेवाएं संचालित करता आ रहा है। तोड़े गए स्थल पर प्रतिदिन हजारों लोगों के लिए लंगर प्रसाद बनता था,जिसे सेवा और सामुदायिक पहचान का प्रतीक माना जाता है।

पौराणिक परंपरा के अनुसार यह स्थल लगभग 1400 वर्ष पुराना माना जाता है। यहां पूज्य श्री श्री 1008 बाबा पीर रतननाथ जी महाराज,जिन्हें आदि गुरु गोरखनाथ जी का परम शिष्य माना जाता है,की परंपरा स्थापित है। वर्तमान में इस परंपरा की 31वीं पीठ पर श्री श्री 1008 बाबा लक्ष्मण दास स्वामी जी महाराज विराजमान हैं।नाथ परंपरा के लगभग 1.25 करोड़ अनुयायी देश-विदेश के करीब 50 स्थानों पर सक्रिय हैं, जिनमें जर्मनी,लंदन,अमेरिका,कनाडा,ऑस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान और पाकिस्तान शामिल हैं।
सभी सेवादारों की ओर से नरेंद्र मोदी, अमित शाह,योगी आदित्यनाथ और रेखा गुप्ता से विनम्र अपील की गई है कि शिवरात्रि मेले को ध्यान में रखते हुए, जहां लाखों सेवादार देश-विदेश से दिल्ली आते हैं और रुकते हैं, मंदिर परिसर की जगह शीघ्रातिशीघ्र वापस प्रदान की जाए ताकि शिवरात्रि का मेला विधिवत और श्रद्धापूर्वक संपन्न हो सके।

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