लाडली बहनों के नाम पर लोन घोटाला
बिना जानकारी व सहमति के पास हुआ 3 लाख का कर्ज, यूनियन बैंक की भूमिका पर उठे सवाल

सिंगरौली।सिंगरौली जिले की सरई तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत गन्नई के खाड़ीटोला गांव से एक गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। यहां करीब एक दर्जन महिलाओं के खातों से अचानक किस्त कटने लगी, जिसके बाद महिलाएं यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सरई शाखा पहुंचीं। बैंक से मिली जानकारी ने सभी को चौंका दिया।
बैंक के अनुसार वर्ष 2021 में “इंद्रा स्व-सहायता समूह, खाड़ीटोला” के नाम पर 3 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया है। हैरानी की बात यह है कि जिन महिलाओं को इस समूह का सदस्य बताया गया है, उन्हें न तो समूह के गठन की जानकारी थी और न ही उन्होंने कभी लोन के लिए सहमति दी।
समूह की कथित अध्यक्ष इंद्रावती सिंह ने कहा कि उन्हें स्वयं यह जानकारी नहीं थी कि वे किसी समूह की अध्यक्ष हैं। किसी भी महिला को यह भी नहीं पता कि समूह का सचिव कौन है। गांव में संदेह जताया जा रहा है कि सरस्वती देवी जायसवाल इस समूह से जुड़ी हो सकती हैं और आरोप है कि उनके पति राजेंद्र जायसवाल ने कथित रूप से महिलाओं की जानकारी के बिना दस्तावेज तैयार कर लोन स्वीकृत कराया।मामला उजागर होने के बाद से राजेंद्र जायसवाल गांव से गायब बताया जा रहा है, जिससे संदेह और गहरा गया है।पीड़ित महिलाएं अब बैंक से लोन फाइल, हस्ताक्षर और दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग कर रही हैं ताकि वे पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकें। महिलाओं का आरोप है कि बैंक द्वारा भी पूरा सहयोग नहीं किया जा रहा।इस पूरे प्रकरण में यह सवाल अहम है कि बिना महिलाओं की मौजूदगी, पहचान और सहमति के लोन कैसे पास हुआ? इससे बैंक कर्मचारियों की लापरवाही या संभावित मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।पीड़ित महिलाएं प्रशासन से निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और कर्ज को निरस्त करने की मांग कर रही हैं। यह मामला स्व-सहायता समूहों की निगरानी और बैंकिंग व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।













