चितरंगी में शराब का साम्राज्य: आबकारी और पुलिस की मिलीभगत से फलता-फूलता अवैध पैकारी नेटवर्क

सिंगरौली-सिंगरौली के चितरंगी क्षेत्र में इन दिनों अवैध शराब का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, जो पुलिस और आबकारी विभाग की कथित मिलीभगत से फल-फूल रहा है। अब चितरंगी क्षेत्र अवैध अंग्रेजी और देशी शराब की पैकारी का गढ़ बन चुका है। हालात इस हद तक बिगड़ चुके हैं कि हर गांव, टोला और बस्ती में खुलेआम शराब बिक रही है, और यह सब स्थानीय प्रशासन और पुलिस की चुप्पी के कारण हो रहा है।
उत्तर प्रदेश से होती है शराब की भारी खेप की आपूर्ति
सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश से भारी मात्रा में शराब की खेपें चितरंगी ब्लॉक में पहुंच रही हैं। ये शराब सीमावर्ती इलाकों का फायदा उठाकर सुनियोजित पैकारी नेटवर्क के जरिए गांव-गांव तक पहुंचाई जा रही है। इसमें किसी प्रकार का डर या छापेमारी नहीं हो रही, जो यह साबित करता है कि यह अवैध कारोबार किसी संरक्षण के बिना संभव नहीं हो सकता।
हर गांव में अवैध ठिकाने, प्रशासन मौन
गांव-गांव में शराब की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। कई स्थानों पर तो घरों को ही शराब की दुकानों में तब्दील कर दिया गया है। खासतौर पर, युवाओं और मजदूर वर्ग को निशाना बनाकर शराब परोसी जा रही है, जिसका असर सामाजिक अपराध, घरेलू हिंसा और आर्थिक तबाही पर पड़ रहा है। शराब के सेवन से इलाके में अराजकता का माहौल बनता जा रहा है।
स्थानीय ठेकेदारों की कमाई बढ़ी
इस अवैध कारोबार का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय शराब ठेकेदारों को हो रहा है, जिनकी कमाई कई गुना बढ़ चुकी है। सूत्र बताते हैं कि बिना आबकारी विभाग की मौन सहमति के यह अवैध कारोबार संभव ही नहीं हो सकता। सवाल यह है कि आखिर कैसे वैध शराब दुकानों के आड़ में अवैध शराब की बिक्री जोरों पर हो रही है?
पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल
चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस गश्त और आबकारी विभाग की नियमित कार्रवाई के दावों के बावजूद अवैध शराब की बिक्री में कोई कमी नहीं आई है। न तो कोई बड़ी कार्रवाई हुई है, न ही किसी बड़े सरगना पर शिकंजा कसा गया है। यह स्थिति प्रशासनिक नाकामी नहीं, बल्कि संरक्षण का स्पष्ट संकेत देती है।
राजस्व को हो रहा है भारी नुकसान
अवैध शराब के कारोबार से सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है। जिस पैसे से विकास कार्य जैसे स्कूल, अस्पताल, सड़कें बननी चाहिए, वह पैसा शराब माफिया की जेब में जा रहा है। और जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।
जनता का सवाल—कब होगा यह गठजोड़ टूटेगा?
चंदरंगी क्षेत्र के लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या जिले के वरिष्ठ अधिकारी इस अवैध धंधे से अनजान हैं या फिर सब कुछ जानने के बावजूद इसे अनदेखा किया जा रहा है? यदि शीघ्र ही निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह अवैध शराब माफिया पूरे क्षेत्र को सामाजिक अराजकता की आग में झोंक सकता है।
अब प्रशासन की भूमिका अहम
अब यह देखना है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है। क्या चितरंगी क्षेत्र प्रशासन जागेगा, या फिर यह अवैध शराब का साम्राज्य स्थायी रूप से यहीं रह जाएगा? यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।













