मध्य प्रदेशसिंगरौली

सिंगरौली उप चुनाव: कांग्रेस ने भाजपा का 25 साल पुराना गढ़ ध्वस्त किया, सियासी समीकरण बदले

सिंगरौली-सिंगरौली में स्थित देश की सबसे बड़ी ताप विद्युत परियोजना हृञ्जक्कष्ट के आवासीय परिसर में स्थित नगर निगम के वार्ड क्रमांक 34 में एक ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव देखने को मिला। भाजपा का 25 साल पुराना ‘अभेद्य सुंदर किलाÓ इस उप चुनाव में कांग्रेस के हाथों धराशायी हो गया। कांग्रेस के प्रत्याशी विजय शाह ने भाजपा के प्रत्याशी अशोक सिंह को 173 मतों से हराकर भाजपा के दबदबे को खत्म कर दिया।

मतगणना में कांग्रेस ने बनाई बढ़त
1 जनवरी को मतदान और 3 जनवरी को हुई मतगणना में कांग्रेस को 417 मत मिले, जबकि भाजपा को केवल 244 मतों पर संतुष्ट होना पड़ा। इस परिणाम ने न केवल एक वार्ड की हार-जीत को उजागर किया, बल्कि भाजपा की रणनीति, नेतृत्व और जमीनी पकड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

पार्षद स्व. रंजना पटेल की मौत के बाद हुआ उप चुनाव
यह उप चुनाव भाजपा की महिला पार्षद स्व. रंजना पटेल के आकस्मिक निधन के बाद कराया गया था। 25 वर्षों से इस वार्ड में भाजपा का दबदबा था, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी विजय शाह ने अपने नाम के साथ ही भाजपा के चुनावी वर्चस्व को ध्वस्त कर दिया। कांग्रेस की जीत को स्थानीय राजनीति में एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट माना जा रहा है।

भाजपा की रणनीति पर सवाल
भाजपा का यह गढ़ था, जहां पार्टी कभी चुनाव नहीं हारी। पूर्व में भाजपा की पार्षद पूनम सिंह और स्व. रंजना पटेल ने लगातार जीत दर्ज की थी, लेकिन इस उप चुनाव में कांग्रेस के विजय शाह ने भाजपा के पूरे चुनावी इतिहास को पलट दिया। यह हार इसलिए भी चौंकाने वाली रही क्योंकि भाजपा प्रत्याशी अशोक सिंह हृञ्जक्कष्ट परियोजना में व्यक्तिगत रूप से लोकप्रिय माने जाते थे।

मंत्री, विधायक, और जिलाध्यक्ष भी नहीं बचा पाए भाजपा की साख
भाजपा ने इस उप चुनाव में पूरी ताकत झोंकी थी। मंत्री, विधायक, नगर निगम अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष सहित कई स्टार प्रचारकों ने प्रचार किया, लेकिन जनता का निर्णय नहीं बदल सका। वहीं, कांग्रेस ने पूर्व महापौर रेनू शाह, जिलाध्यक्ष प्रवीण सिंह चौहान, अमित द्विवेदी और पूरी टीम की संगठित रणनीति के साथ चुनाव लड़ा, और परिणाम कांग्रेस के पक्ष में गया।

नवागत जिलाध्यक्षों की प्रतिष्ठा की परीक्षा
यह उप चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के नवागत जिलाध्यक्षों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया था। भाजपा के जिलाध्यक्ष सुंदर शाह और कांग्रेस के जिलाध्यक्ष प्रवीण सिंह चौहान के लिए यह पहला चुनाव था, जो एक तरह से उनका ‘एंट्रेंस एग्ज़ाम था। परिणाम ने यह साफ कर दिया कि कांग्रेस जिलाध्यक्ष परीक्षा में उत्तीर्ण हुए, जबकि भाजपा जिलाध्यक्ष अनुत्तीर्ण हो गए।

क्या वायरल वीडियो ने भाजपा की हार का कारण बना?
भाजपा की हार के बाद अब मंथन और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। चर्चा है कि चुनाव के ठीक पहले भाजपा के चुनाव प्रभारी और नगर निगम अध्यक्ष देवेश पाण्डेय का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे यह कहते नजर आए थे कि वे जयंत क्षेत्र में हैं, जबकि कैमरे में वे एनटीपीसी आवासीय परिसर में दिखाई दे रहे थे। कांग्रेस ने इसे आचार संहिता उल्लंघन और झूठ का प्रतीक बनाकर प्रचारित किया। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस वीडियो के चलते भाजपा की हार हुई?

वार्ड 34 का परिणाम, बड़े सियासी संकेत
वार्ड 34 का यह उप चुनाव सिर्फ एक सीट की हार-जीत नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा सियासी संकेत है। यह परिणाम यह दर्शाता है कि आज के समय में शिक्षित मतदाता अब केवल सत्ता, संसाधन और प्रचार से प्रभावित नहीं होता, बल्कि वह चेहरे, साख और विश्वसनीयता पर भी वोट करता है। भाजपा की पुरानी रणनीतियों के मुकाबले अब नए चेहरे और ईमानदारी को प्राथमिकता दी जा रही है।

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