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वर्ष 2026 में प्रमुख स्नान पर्वों की सूची और धार्मिक महत्व

 

भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में नदियों को जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी शक्ति के रूप में पूजा जाता है। हर साल देशभर में ऐसे कई स्नान पर्व होते हैं, जिनका महत्व न केवल शारीरिक शुद्धि के लिए, बल्कि आत्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति के लिए भी अत्यधिक है। साल 2026 में भी कई महत्वपूर्ण स्नान पर्व होंगे, जिनमें लाखों श्रद्धालु देश की पवित्र नदियों, जैसे गंगा, यमुना, नर्मदा और शिप्रा के तटों पर एकत्रित होंगे।

1. मकर संक्रांति (14 जनवरी 2026)
मकर संक्रांति साल का पहला और सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की यात्रा शुरू करते हैं। इसे देवताओं का दिन माना जाता है। इस दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से आत्मिक उन्नति होती है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

2. मौनी अमावस्या (18 जनवरी 2026)
माघ मास की मौनी अमावस्या को गंगा का जल अमृत के समान माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से मौन रहकर स्नान करने से मानसिक शांति और आत्मिक बल प्राप्त होता है। यह दिन माघ मास की सबसे पवित्र तिथि है और मुनि पद की प्राप्ति का अवसर भी माना जाता है।

3. माघ पूर्णिमा (1 फरवरी 2026)
माघ पूर्णिमा के दिन गंगा जल में भगवान विष्णु निवास करते हैं। इस दिन तिल, अन्न, घी और कंबल का दान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है। प्रयागराज में इस दिन का महत्व विशेष रूप से अधिक है, जहां लाखों श्रद्धालु कल्पवास करते हुए इस पर्व को मनाते हैं।

4. गंगा दशहरा (25 मई 2026)
गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह वह दिन है जब मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं थीं, और इस दिन गंगा में स्नान करने से दस प्रकार के पापों का शमन होता है। गंगा दशहरा पर स्नान से शरीर और आत्मा दोनों की शुद्धि होती है।

5. कार्तिक पूर्णिमा (24 नवंबर 2026)
कार्तिक पूर्णिमा का पर्व, जिसे देव दिवाली भी कहा जाता है, शीत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। इस दिन विशेष रूप से नदियों में दीपदान करने की परंपरा है, जिससे पितरों को तृप्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। ज्योतिषियों के अनुसार, 2026 में यह पर्व विशेष रूप से फलदायी होगा, क्योंकि ग्रहों की स्थितियाँ दान-पुण्य के लिए शुभ फल देने वाली होंगी।

धार्मिक और सामाजिक महत्व
इन स्नान पर्वों का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भी है। ये पर्व पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने का काम करते हैं। लाखों श्रद्धालु तीर्थ स्थलों पर एकत्र होते हैं, और इन अवसरों पर विशेष मेलों का आयोजन होता है। इन मेलों से न केवल धार्मिक कार्य होते हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।

प्रशासन की तैयारियां
इन विशेष तिथियों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने अपनी तैयारियां पहले ही शुरू कर दी हैं। मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या जैसे बड़े आयोजन में श्रद्धालुओं को सुरक्षा, स्वच्छता, और समुचित सुविधाएँ प्रदान करने के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। हरिद्वार, काशी, प्रयागराज और उज्जैन जैसे प्रमुख तीर्थ नगरों में इन दिनों मेले आयोजित किए जाएंगे, जो न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होंगे, बल्कि स्थानीय संस्कृति और पर्यटन को भी समृद्ध करेंगे।

घर पर ही स्नान और दान
जो लोग इन पवित्र तिथियों पर तीर्थ स्थलों तक जाने में असमर्थ हैं, वे घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं और दान-पुण्य के माध्यम से समान फल प्राप्त कर सकते हैं।

वर्ष 2026 का यह कैलेंडर धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यधिक समृद्ध रहने वाला है, जिसमें श्रद्धालुओं को भक्ति, सेवा और मोक्ष के कई अवसर मिलेंगे।

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