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हयात रीजेंसी होटल नीलामी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और बैंकों से मांगा जवाब

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली स्थित हयात रीजेंसी होटल की नीलामी से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए वैल्यूएशन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह मामला गैर-सरकारी संगठन इंफ्रास्ट्रक्चर वॉचडॉग द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत में इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की प्रक्रिया के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान वैल्यूएशन प्रक्रिया में कथित दोहरे मापदंड पर चिंता व्यक्त की।

मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कोई गरीब व्यक्ति अपनी संपत्ति बेचने जाता है तो उसकी वैल्यू कम आंकी जाती है, लेकिन बड़े होटलों और कॉरपोरेट संपत्तियों के मामले में अलग मानक अपनाए जाने पर सवाल उठते हैं। कोर्ट ने कहा कि संपत्ति की वैल्यू तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से एशियन होटल्स ग्रुप (हयात रीजेंसी दिल्ली) के खिलाफ वैल्यूएशन और आईबीसी प्रक्रिया का पूरा विवरण मांगा है। अदालत ने यह भी पूछा कि कर्ज चुकाने में चूक के बाद होटल की वैल्यूएशन किस आधार पर तय की गई।

कोर्ट ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पंजाब नेशनल बैंक और एशियन होटल्स ग्रुप को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से होटल की कीमत जानबूझकर कम आंकी गई, जिससे बड़े लोन माफ करने और सार्वजनिक धन को नुकसान पहुंचाने की आशंका है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि कर्जदार को संपत्ति बचाने का उचित अवसर मिलना चाहिए और आईबीसी प्रक्रिया में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित होना जरूरी है। मामले की अगली सुनवाई में सरकार और संबंधित बैंकों के जवाब के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

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