मध्यप्रदेश का हर मतदाता गरीब? राशन और वोटर लिस्ट के आंकड़ों पर सियासी संग्राम

भोपाल। मध्यप्रदेश में मोहन यादव सरकार के दो साल पूरे होने पर मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बुधवार को अपने विभाग की उपलब्धियां गिनाईं, लेकिन उनके आंकड़ों को लेकर राजनीतिक घमासान खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने दावा किया है कि सरकार “आंकड़ों की बाजीगरी” कर रही है और प्रदेश में गरीबी को लेकर विरोधाभासी तस्वीर पेश की जा रही है।
खाद्य मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रदेश में गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 5 करोड़ 25 लाख लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों में 22,800 करोड़ रुपए का राशन वितरित किया गया है। साथ ही यह भी बताया कि अन्य राज्यों के करीब 6 हजार परिवार मध्यप्रदेश से राशन ले रहे हैं, जबकि मध्यप्रदेश के 39 हजार परिवार दूसरे राज्यों में जाकर नि:शुल्क राशन प्राप्त कर रहे हैं।
इसी बीच कांग्रेस ने चुनाव आयोग के हालिया आंकड़ों को सामने रखते हुए सरकार पर सवाल खड़े कर दिए। कांग्रेस मीडिया प्रभारी मुकेश नायक ने कहा कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के बाद प्रदेश में 5 करोड़ 31 लाख मतदाता दर्ज हैं, जबकि सरकार के मुताबिक 5 करोड़ 25 लाख लोग मुफ्त राशन ले रहे हैं। यानी औसतन हर मतदाता गरीब है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि जब सरकार प्रति व्यक्ति आय बढ़ने और गरीबी घटने के दावे कर रही थी, तो ये आंकड़े किस हकीकत को दर्शाते हैं?
कांग्रेस ने यह सवाल भी उठाया कि मतदाता सूची से हटाए गए 41 लाख नामों का क्या होगा? क्या उन्हें राशन मिलेगा या नहीं?
मंत्री राजपूत ने कहा कि सरकार ने 35 लाख अपात्र, डुप्लीकेट और मृत हितग्राहियों के नाम हटाए और 14 लाख नए पात्र हितग्राही जोड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि वन नेशन–वन राशन कार्ड और नॉमिनी व्यवस्था से अब कोई भी पात्र व्यक्ति राशन से वंचित नहीं रहेगा।
सरकार जहां इसे सुशासन और खाद्य सुरक्षा की सफलता बता रही है, वहीं विपक्ष इसे गरीबी और सरकारी दावों के बीच गहरे विरोधाभास के रूप में पेश कर रहा है।













