प्रयागराज-चितरंगी-सिंगरौली एनएच-135सी डेढ़ साल से ठंडे बस्ते में, जनता में बढ़ी मायूसी
एलाइमेंट निरस्त होने के बाद नई रूपरेखा पर चुप्पी, जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर उठे सवाल

सिंगरौली। प्रयागराज-चितरंगी बाया सिंगरौली प्रस्तावित नेशनल हाईवे 135सी का मामला बीते करीब डेढ़ वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा सड़क के प्रस्तावित एलाइमेंट को निरस्त किए जाने के बाद अब तक न तो नया एलाइमेंट तय हो सका है और न ही आगे की प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने आई है। इससे चितरंगी क्षेत्र सहित पूरे सिंगरौली अंचल के लोगों में गहरी निराशा व्याप्त है।
गौरतलब है कि करीब तीन वर्ष पूर्व भाजपा नेताओं के प्रयासों से इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिली थी। यह मार्ग सिंगरौली के लिए ‘लाइफ लाइन माना जा रहा था।
प्रस्तावित मार्ग की जानकारी मिलने के बाद करीब तीन हजार से अधिक मकान भूमि स्वामियों द्वारा बनाए गए, जिस पर अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए शिकायतें की गईं। इसके बाद तत्कालीन एसडीएम चितरंगी एवं कलेक्टर द्वारा एलाइमेंट निरस्त कराने का प्रतिवेदन मंत्रालय को भेजा गया, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
एलाइमेंट निरस्त होने के बाद चर्चा थी कि नए सिरे से सड़क का निर्धारण होगा, लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद जिला प्रशासन और एमपीआरडीसी की ओर से कोई ठोस जानकारी नहीं दी जा रही है। इस बीच भाजपा के केंद्रीय संगठन महामंत्री अरुण सिंह द्वारा भी सार्वजनिक मंच से स्थानीय नेताओं को सड़क ठंडे बस्ते में जाने का जिम्मेदार ठहराया गया था, बावजूद इसके कोई सक्रियता नजर नहीं आई।
अब क्षेत्र की जनता सवाल कर रही है कि आखिर सांसद, मंत्री और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर मौन क्यों हैं। क्या यह सड़क कभी बनेगी या फिर फाइलों में ही दबकर रह जाएगी—यही सवाल चितरंगी क्षेत्र में आम चर्चा का विषय बन गया है।













