एससी/एसटी एक्ट मामले में ज्ञानेन्द्र पाठक दोषमुक्त, पुलिस विवेचना पर उठे सवाल

सिंगरौली-अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज एक प्रकरण में विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) माननीय खालिद मोहतरम अहमद की अदालत ने ग्राम धानी निवासी ज्ञानेन्द्र पाठक उर्फ प्रधान को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। यह मामला थाना चितरंगी क्षेत्र से जुड़ा था, जबकि विवेचना अजाक थाना सिंगरौली द्वारा की गई थी।
अभियोजन के अनुसार 28 अगस्त 2021 को ग्राम धानी में फसल चराने के विवाद को लेकर फरियादी सनत कोल के साथ मारपीट और जातिगत गाली-गलौज का आरोप लगाया गया था। इस संबंध में 29 सितंबर 2021 को एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने 17 दिसंबर 2021 को चालान पेश किया और 15 फरवरी 2022 को आरोप तय किए गए।मुकदमे की सुनवाई के दौरान फरियादी और आरोपी के बीच राजीनामा हो गया, जिसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 359 के तहत न्यायालय ने स्वीकार किया। इसके बाद फरियादी ने अदालत में बयान दिया कि उसके साथ न तो जातिगत गाली-गलौज हुई और न ही जाति के आधार पर कोई अपमान किया गया। इस बयान से अभियोजन का मामला कमजोर पड़ गया।
फरियादी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उससे थाने में कोरे कागजों पर अंगूठा लगवाया था। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अभियोजन की कहानी को अविश्वसनीय मानते हुए आरोपी को बाइज्जत दोषमुक्त कर दिया।
यह फैसला पुलिस की विवेचना प्रक्रिया और एससी/एसटी एक्ट जैसे संवेदनशील कानूनों के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।













