दुग्धाभिषेक का वायरल वीडियो बना बहस का मुद्दा, आस्था और मानवता के बीच संतुलन पर उठे सवाल
गंगा घाट पर दूध बहाने और भूखी बच्चियों को दूर करने के दृश्य ने सोशल मीडिया पर छेड़ी नैतिकता की बहस

भारत में धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़े अनुष्ठान अक्सर श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक माने जाते हैं, लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने इन परंपराओं की सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है। यह वीडियो गंगा घाट का बताया जा रहा है, जहां एक श्रद्धालु दुग्धाभिषेक के तहत लीटरों दूध नदी में प्रवाहित करता दिखाई देता है।
वीडियो में यह भी देखा गया कि कुछ छोटी बच्चियां खाली बर्तन लेकर बहते दूध को इकट्ठा करने की कोशिश करती हैं, लेकिन श्रद्धालु उनके पास आते ही अपनी जगह बदल लेता है, ताकि दूध उनके बर्तनों में न गिरे। यह दृश्य सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। बड़ी संख्या में लोगों ने इसे असंवेदनशीलता बताते हुए कहा कि भूखे को भोजन कराना ही सबसे बड़ी पूजा है।
वहीं, कुछ लोगों ने श्रद्धालु का समर्थन करते हुए इसे व्यक्तिगत आस्था का विषय बताया और कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों को सामाजिक नजरिए से नहीं परखा जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना आस्था और करुणा के बीच संतुलन की जरूरत को रेखांकित करती है।
इस वायरल वीडियो ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या धार्मिक कर्मकांडों के साथ मानवीय संवेदनाओं को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए।













