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इंदौर की जल त्रासदी: दूषित पानी से मौतों पर ‘वाटरमैन ऑफ इंडिया’ ने भ्रष्टाचार और लापरवाही को बताया जिम्मेदार

इंदौर, मध्य प्रदेश | मध्य प्रदेश के इंदौर, जिसे पिछले कई वर्षों से देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में सम्मानित किया जाता रहा है, अब एक बड़ी जल त्रासदी का शिकार हो गया है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल के सेवन से अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। इस घटना पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए जल संरक्षण विशेषज्ञ और ‘वाटरमैन ऑफ इंडिया’ के नाम से प्रसिद्ध राजेंद्र सिंह ने इसे एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि “सिस्टम द्वारा पैदा की गई आपदा” करार दिया है।

दूषित पानी से हुआ संक्रमण
रविवार को यह खबर आई कि भागीरथपुरा इलाके में कई लोग अचानक उल्टी, दस्त और अन्य गंभीर शारीरिक समस्याओं से ग्रस्त हो गए। जांच में पता चला कि यह संकट तब सामने आया जब इलाके में पेयजल की मुख्य पाइपलाइन में रिसाव पाया गया, जिसके बाद सीवेज से मिलकर पानी पूरी तरह से दूषित हो गया। इस दूषित पानी के सेवन से अब तक छह मौतें हो चुकी हैं, जबकि 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हैं। इनमें से 30 से अधिक लोगों की हालत नाजुक है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है। स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि मृतकों की संख्या 10 से 14 के बीच हो सकती है।

राजेंद्र सिंह ने भ्रष्टाचार को ठहराया जिम्मेदार
राजेंद्र सिंह ने इस त्रासदी के लिए इंदौर की भ्रष्ट व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यह घटना जमीनी हकीकत और स्वच्छता के दावों के बीच के अंतर को उजागर करती है। सिंह ने आरोप लगाया कि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण पेयजल पाइपलाइनों को ड्रेनेज लाइनों के नजदीक बिछाया गया, जिससे न केवल जल आपूर्ति असुरक्षित हुई, बल्कि नागरिकों के जीवन को भी खतरे में डाल दिया।

इंदौर में जल संकट की जड़ें
राजेंद्र सिंह ने कहा कि यह त्रासदी इंदौर के जल प्रबंधन में नाकामयाबी को दर्शाती है। उन्होंने याद दिलाया कि जब वह 1992 में इंदौर आए थे, तो उन्होंने पूछा था कि आखिरकार इंदौर कब तक नर्मदा नदी पर निर्भर रहेगा? तीन दशकों से अधिक समय बीतने के बावजूद यदि इंदौर आज भी नर्मदा के पानी पर निर्भर है, तो इसका मतलब है कि प्रशासन ने कभी टिकाऊ जल प्रबंधन का प्रयास नहीं किया।

सिंह ने आगे कहा कि इंदौर की जल आपूर्ति व्यवस्था में प्रति माह 25 करोड़ रुपये केवल बिजली के खर्च में जा रहे हैं, लेकिन इस भारी खर्च के बावजूद जल प्रबंधन में कोई सुधार नहीं हुआ। उनका मानना है कि यदि यह राशि स्थानीय जल स्रोतों, वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज पर खर्च की जाती, तो शहर में जल संकट इतनी गंभीर स्थिति में नहीं होता।

महापौर का विवादास्पद बयान
इस घटना के बाद इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव का एक पुराना बयान भी चर्चा में आया है। जून 2024 में, भार्गव ने मजाकिया अंदाज में कहा था, “हम पानी नहीं, घी पी रहे हैं।” उस समय इस बयान को हल्के-फुल्के अंदाज में लिया गया था, लेकिन अब यह बयान इंदौर की जल आपूर्ति व्यवस्था की गंभीर समस्याओं को उजागर कर रहा है।

भविष्य के लिए चेतावनी
राजेंद्र सिंह ने इंदौर के जल संकट को लेकर गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि अब भी जल प्रबंधन को लेकर ईमानदार और स्थायी कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी त्रासदियां भविष्य में और भी बढ़ सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इंदौर की जल त्रासदी अब एक शहर की कहानी नहीं रही, बल्कि यह पूरे देश के लिए एक चेतावनी बन चुकी है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रशासन ने प्रभावित इलाके में जल आपूर्ति बंद कर दी है और वैकल्पिक व्यवस्था के तहत टैंकरों से साफ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही पूरे पाइपलाइन नेटवर्क की जांच के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, सवाल यह है कि क्या यह कदम केवल तात्कालिक राहत तक सीमित रहेंगे या फिर इस त्रासदी से सबक लेकर व्यवस्था में मौलिक सुधार किए जाएंगे।

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