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कोटा में भैंस और बछड़े पर विवाद: पशु चिकित्सकीय जांच के बाद रामलाल को मिला मालिकाना हक

कोटा, राजस्थान | राजस्थान के कोटा जिले में एक दिलचस्प मामला सामने आया है, जिसमें दो व्यक्तियों ने एक ही भैंस और उसके बछड़े पर अपना-अपना दावा ठोक दिया। यह मामला इतना जटिल हो गया कि पुलिस और प्रशासन को इसे सुलझाने के लिए वैज्ञानिक और पशु चिकित्सकीय आधार पर फैसला करना पड़ा। अंततः जांच में रामलाल के दावे को सही माना गया और भैंस और बछड़े को उनके हवाले कर दिया गया।

पशु स्वामित्व को लेकर बढ़ा विवाद
यह मामला कोटा के कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र का है, जहां नारायण विहार निवासी रामलाल ने लगभग एक महीने पहले अपनी भैंस और बछड़े के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई थी। रामलाल का कहना था कि वह लगातार अपनी भैंस और बछड़े की तलाश कर रहा था, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। फिर उसे जानकारी मिली कि रामचंद्रपुरा मरगिया बस्ती इलाके में इंद्रजीत केवट के बाड़े में एक भैंस और बछड़ा बंधे हुए हैं, जो उसके पशुओं से मेल खाते हैं। जब रामलाल वहां पहुंचा तो उसने तुरंत दावा किया कि वे उसी के हैं।

इंद्रजीत का विरोध
रामलाल का यह दावा इंद्रजीत केवट ने कड़ा विरोध किया। इंद्रजीत का कहना था कि यह भैंस उसने दो साल पहले बड़ी गांव से खरीदी थी और उसकी उम्र लगभग सात साल है। इंद्रजीत ने जोर देकर कहा कि भैंस और बछड़े पर उसका पूरा हक है। दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ता गया, और मामला थाने तक पहुंच गया।

पुलिस की जांच और विशेषज्ञ राय
कुन्हाड़ी थाने की सर्किल इंस्पेक्टर कौशल्या ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ के बाद दोनों पक्षों के दावे में अंतर पाया गया। रामलाल का कहना था कि उसकी भैंस की उम्र चार से पांच साल के बीच है और उसने हाल ही में बछड़े को जन्म दिया है, जबकि इंद्रजीत ने दावा किया कि भैंस की उम्र सात साल है। चूंकि दोनों के दावों में अंतर था, पुलिस ने मामले को सुलझाने के लिए पशु चिकित्सकीय जांच कराने का निर्णय लिया।

पशु चिकित्सकीय रिपोर्ट से सुलझा मामला
पुलिस ने भैंस और बछड़े को कोटा के मोखापाड़ा स्थित सरकारी पशु चिकित्सालय भेजा, जहां पशु चिकित्सकों ने उनकी उम्र और शारीरिक स्थिति का आकलन किया। जांच में पाया गया कि भैंस की उम्र चार से पांच साल के बीच है, और उसने हाल ही में बछड़े को जन्म दिया है। पशु चिकित्सकों की रिपोर्ट ने रामलाल के दावे को समर्थन दिया और इसे सही पाया।

पुलिस का फैसला और रामलाल को भैंस और बछड़ा सौंपा गया
मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने रामलाल के दावे को सही माना और भैंस और बछड़े को आधिकारिक रूप से रामलाल को सौंप दिया। हालांकि इंद्रजीत ने इस फैसले पर आपत्ति जताई, लेकिन वह अपने पक्ष में ठोस साक्ष्य पेश करने में असमर्थ रहा। इसके बाद पुलिस ने रामलाल के पक्ष में फैसला दिया।

कानून और विज्ञान का संयोजन
इस मामले ने यह साबित किया कि जब पशुओं के स्वामित्व को लेकर विवाद होते हैं, तो न्यायिक प्रक्रिया में विज्ञान और तकनीकी उपायों का अहम योगदान होता है। इस घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रामीण इलाकों में पशुओं का स्वामित्व केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं होता, बल्कि यह भावनात्मक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होता है।

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