मध्य प्रदेशसिंगरौली

सिंगरौली के आदिवासियों की आवाज जनसंसद में गूंजी

जंगल कटाई और जमीन अधिग्रहण का दर्द सुनकर भावुक हुए प्रतिनिधि

राहुल गांधी बोले- जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों का पहला अधिकार

सिंगरौली। सिंगरौली जिले के आदिवासी समुदाय की समस्याएं अब राष्ट्रीय स्तर पर गूंजने लगी हैं। दिल्ली में आयोजित जनसंसद कार्यक्रम के दौरान सिंगरौली से पहुंचे आदिवासी प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर अपने क्षेत्र में जंगलों की कटाई और भूमि अधिग्रहण से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाए। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में शामिल महिलाओं और ग्रामीणों ने अपने पारंपरिक जंगलों के खत्म होने और उससे प्रभावित आजीविका की पीड़ा भावुक होकर साझा की।

जंगल खत्म होने से जीवन और संस्कृति पर संकट
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने राहुल गांधी को बताया कि सिंगरौली क्षेत्र में तेजी से हो रही जंगलों की कटाई से आदिवासी समुदाय का पारंपरिक जीवन प्रभावित हो रहा है। उनका कहना था कि जंगल उनके लिए केवल लकड़ी या संसाधन का स्रोत नहीं है, बल्कि उनकी संस्कृति, परंपरा, आस्था और आजीविका का आधार है।

आदिवासी प्रतिनिधियों ने बताया कि जंगल खत्म होने से वन उपज, पशुपालन और पारंपरिक खेती पर गंभीर असर पड़ा है। इसके साथ ही कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

भूमि अधिग्रहण से उजड़ रहे गांव
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में बड़े औद्योगिक और खनन परियोजनाओं के लिए लगातार भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे आदिवासी परिवार अपने पुश्तैनी घरों और जमीन से विस्थापित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है।

राहुल गांधी ने जताई चिंता, दिया साथ का भरोसा
आदिवासी प्रतिनिधिमंडल की बात सुनने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि आदिवासी समाज देश के मूल निवासी हैं और जल, जंगल और जमीन पर उनका नैतिक और संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए आदिवासी समुदाय की अनदेखी कर रही है।
राहुल गांधी ने कहा कि देशभर में आदिवासियों की पुश्तैनी जमीनों का अधिग्रहण तेजी से किया जा रहा है, जिससे उनके जीवन और संस्कृति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए वह लगातार आवाज उठाते रहेंगे।

प्रतिनिधिमंडल ने रखीं ये प्रमुख मांगें
आदिवासी प्रतिनिधिमंडल ने जनसंसद के मंच पर अपनी समस्याएं रखते हुए कई मांगें भी रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—
जंगलों की अंधाधुंध कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए
प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए
विस्थापित परिवारों के लिए स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था की जाए
पारंपरिक वन अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए
स्थानीय लोगों को रोजगार और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएं

सिंगरौली में लंबे समय से उठ रहे हैं विस्थापन के मुद्दे
सिंगरौली क्षेत्र लंबे समय से कोयला खनन, बिजली परियोजनाओं और औद्योगिक विस्तार के कारण विस्थापन और पर्यावरणीय संकट को लेकर चर्चा में रहा है। स्थानीय आदिवासी समुदाय समय-समय पर अपने अधिकारों और संसाधनों की सुरक्षा को लेकर आंदोलन करता रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर उठी आवाज

जनसंसद कार्यक्रम के दौरान सिंगरौली के आदिवासियों की समस्याओं का राष्ट्रीय मंच पर उठना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस मुद्दे पर अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज होगी और सरकार द्वारा ठोस कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि, अब यह देखना होगा कि आदिवासी समुदाय की इन मांगों पर केंद्र और राज्य सरकार किस प्रकार प्रतिक्रिया देती हैं और प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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