बीना परियोजना के विस्थापित मजदूरों की चेतावनी: 23 फरवरी से आमरण अनशन

सिंगरौली। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) की बीना परियोजना में ओबी (ओवर बर्डन) कार्य कर रही कंपनी चेन्नई राधा इंजीनियरिंग वर्क प्राइवेट लिमिटेड में स्थानीय विस्थापित मजदूरों को रोजगार नहीं दिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पूर्व में कार्यरत बीजीआर-डीईसीओ कंसोर्टियम प्राइवेट लिमिटेड में काम कर चुके विस्थापित मजदूरों ने रोजगार से वंचित किए जाने के विरोध में भूख हड़ताल और आमरण अनशन की चेतावनी दी है।
आवेदनकर्ताओं का कहना है कि उनके दादा-परदादाओं की जमीन एवं आवास बीना परियोजना के लिए अधिग्रहित किए गए थे। 47 वर्ष बीत जाने के बावजूद न तो पूर्ण विस्थापन नीति का पालन किया गया और न ही पूर्व समझौतों के अनुसार पुनर्वास सुनिश्चित किया गया। मजदूरों के अनुसार वे पिछले 15 वर्षों से ओबी कंपनियों में कार्य कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे, लेकिन कंपनी परिवर्तन के बाद उन्हें रोजगार से बाहर कर दिया गया।
मजदूरों का आरोप है कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 18 फरवरी 2022 को जारी अधिसूचना में स्पष्ट प्रावधान है कि संविदा परिवर्तन की स्थिति में पूर्व कार्यरत श्रमिकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त 10 जुलाई 2006 को एनसीएल मुख्यालय द्वारा जारी आदेश में 80 प्रतिशत विस्थापितों को संविदा कार्य में रखने का निर्देश भी दिया गया था। मजदूरों का कहना है कि इसके बावजूद बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जो अन्यायपूर्ण है।
मजदूरों ने बताया कि 19 जनवरी 2026 को वे बीना परियोजना के महाप्रबंधक कार्यालय के मुख्य द्वार पर भूख हड़ताल पर बैठे थे, जहां उन्हें दो दिन में रोजगार दिलाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित मजदूरों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया तो 23 फरवरी 2026 से वे एनसीएल मुख्यालय सिंगरौली के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल एवं आमरण अनशन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी एनसीएल प्रबंधन एवं भारत सरकार की होगी।
इस संबंध में ज्ञापन की प्रतिलिपि एनसीएल बीना परियोजना के महाप्रबंधक, संबंधित कंपनी प्रबंधन, जिला प्रशासन सिंगरौली एवं सोनभद्र तथा पुलिस प्रशासन को भी भेजी गई है।













