अनाथ बेटी के पक्ष में हाईकोर्ट का मानवीय फैसला, अनुकंपा नियुक्ति पर पुनर्विचार के आदेश

ग्वालियर। Madhya Pradesh High Court की ग्वालियर खंडपीठ ने अनाथ बालिका के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को अनुकंपा नियुक्ति के मामले पर दोबारा विचार करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि विशेष परिस्थितियों में केवल तकनीकी आधार पर मानवीय उद्देश्य को विफल नहीं किया जा सकता।
जस्टिस Subodh Abhyankar और जस्टिस Jayakumar Pillai की युगलपीठ ने यह आदेश सुनाया। अदालत ने कहा कि यह निर्णय विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर दिया गया है और इसे अन्य मामलों में मिसाल के रूप में नहीं लिया जाएगा।
क्या है पूरा मामला
मामले में प्रांजल शुक्ला की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी। याचिका में बताया गया कि उनके पिता चंद्रकांत शुक्ला Special Armed Force (एसएएफ) की 15वीं बटालियन में सहायक उपनिरीक्षक थे। वर्ष 2014 में पत्नी के निधन के बाद उन्होंने 31 अगस्त 2018 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी।
इसके बाद 4 दिसंबर 2018 को उन्होंने दोबारा सेवा में लेने के लिए आवेदन दिया, लेकिन 30 दिसंबर 2018 को उनका निधन हो गया। बाद में 28 जनवरी 2019 को विभाग ने उन्हें पुनर्नियुक्ति देते हुए सेवा की निरंतरता प्रदान कर दी। माता-पिता दोनों को खो चुकी बेटी ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने 2019 में उसका दावा खारिज कर दिया। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसे एकलपीठ ने खारिज कर दिया था। उसी आदेश को चुनौती देते हुए युगलपीठ में अपील की गई।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य पीड़ित परिवार को सहारा देना होता है। यदि परिस्थितियां असाधारण हों, तो केवल तकनीकी कारणों से इस उद्देश्य को नकारा नहीं जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने मामले में मानवीय पहलू को प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार को अनुकंपा नियुक्ति पर पुनर्विचार करने के आदेश दिए हैं।













