“नालायक” शब्द से नहीं बनता अपराध, हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री वंशमणि वर्मा के खिलाफ मामला रद्द किया

सिंगरौली। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पूर्व कैबिनेट मंत्री वंशमणि वर्मा के खिलाफ दर्ज अश्लीलता और जानबूझकर अपमान के आरोप वाले आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि “नालायक” जैसे शब्द सामान्य बोलचाल में उपयोग किए जाते हैं और केवल ऐसे शब्दों के आधार पर आपराधिक अपराध नहीं माना जा सकता।
यह निर्णय उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकल पीठ ने सुनाया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि राजनीतिक विरोध या भाषण के दौरान प्रशासन की आलोचना करना या कठोर शब्दों का प्रयोग करना तब तक अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि उसका उद्देश्य जानबूझकर शांति भंग करना था।
क्या था मामला
जानकारी के अनुसार 23 जुलाई 2021 को महंगाई के विरोध में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा सिंगरौली में विरोध प्रदर्शन और रैली आयोजित की गई थी। आरोप था कि कलेक्ट्रेट परिसर के पास जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते समय पूर्व मंत्री वंशमणि वर्मा ने प्रशासन के खिलाफ कथित रूप से अनुचित शब्दों का प्रयोग किया था।
उस समय सिंगरौली के तत्कालीन कलेक्टर राजीव रंजन मीणा थे। घटना के बाद प्रशासनिक निर्देश पर एक पटवारी की शिकायत के आधार पर सिंगरौली पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 294 (सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य) और धारा 504 (जानबूझकर अपमान) के तहत मामला दर्ज किया था। बाद में इस मामले में आरोप पत्र भी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था।
न्यायालय की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने तर्क दिया कि शिकायत में उन कथित अपमानजनक शब्दों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, जिनके आधार पर मामला दर्ज किया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि कथित टिप्पणी प्रशासन की कार्यप्रणाली की आलोचना के संदर्भ में की गई थी।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि धारा 294 तभी लागू होती है जब कोई अश्लील कृत्य या शब्द सार्वजनिक रूप से लोगों को परेशान करें। “नालायक” शब्द अपने आप में अश्लीलता की श्रेणी में नहीं आता।
स्वतंत्र गवाह का अभाव
न्यायालय ने यह भी पाया कि कथित घटना सार्वजनिक स्थान पर होने के बावजूद अभियोजन पक्ष द्वारा किसी स्वतंत्र गवाह का उल्लेख नहीं किया गया। साथ ही मामला प्रशासनिक निर्देश पर दर्ज कराया गया था।
इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने माना कि प्रथम दृष्टया कोई आपराधिक अपराध सिद्ध नहीं होता। इसी आधार पर अदालत ने वंशमणि वर्मा की याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ दर्ज मामला और आगे की कार्यवाही को रद्द कर दिया।
कानूनी जानकार इस फैसले को राजनीतिक भाषण और विरोध प्रदर्शन के दौरान अभिव्यक्ति की सीमा को लेकर एक महत्वपूर्ण न्यायिक टिप्पणी मान रहे हैं।













