‘विकसित भारत 2047’ संगोष्ठी में युवाओं की भूमिका पर मंथन, सही दिशा और अनुशासन पर जोर

भोपाल। राजधानी भोपाल स्थित RKDF University में “विकसित भारत 2047: युवाओं की भूमिका” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के भविष्य निर्माण में युवाओं की अहम भूमिका पर गहन चर्चा हुई। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लेते हुए इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र निर्माण के लिए केवल गति नहीं, बल्कि सही दिशा में प्रयास आवश्यक हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति Mohan Prasad Tiwari ने अपने संबोधन में युवाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि भारत की लगभग 65 प्रतिशत आबादी युवा है, जो देश की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा यदि सही मार्गदर्शन के अभाव में बिखरती है, तो उसका पूरा लाभ देश को नहीं मिल पाता।
उन्होंने युवाओं को इतिहास से सीख लेने, वैश्विक परिदृश्य को समझने और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आर्थिक विकास या जीडीपी वृद्धि ही वास्तविक प्रगति नहीं है, जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक समृद्धि नहीं पहुंचती। उन्होंने आत्मनिर्भरता, सामाजिक न्याय, पर्यावरण संतुलन और संवैधानिक कर्तव्यों के पालन को विकसित भारत की आधारशिला बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. Vijay Agrawal ने विद्यार्थियों को स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि युवा ही परिवर्तन के वास्तविक वाहक हैं और यदि वे ठान लें, तो बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
संगोष्ठी के संयोजक लेफ्टिनेंट प्रोफेसर चंद्र बहादुर सिंह दांगी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में Tejpal Singh Rawat ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल सरकारी प्रयासों से पूरा नहीं होगा, बल्कि इसके लिए जनभागीदारी जरूरी है। उन्होंने युवाओं को “एजेंट ऑफ चेंज” बनने का आह्वान करते हुए शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और तकनीकी नवाचार में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
इस अवसर पर ब्रिगेडियर Rajneesh Singh Gaur ने युवाओं को स्वदेशी सोच अपनाने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि देश को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए युवाओं का आगे आना जरूरी है।
कार्यक्रम में सेवानिवृत्त आईएएस आलोक अवस्थी, एनएसएस के सहायक समन्वयक राहुल सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, एनसीसी कैडेट्स और एनएसएस स्वयंसेवकों ने भी बड़ी संख्या में भाग लेकर अपने विचार साझा किए।
संगोष्ठी का संचालन डॉ. सोनल सिंह और ब्रजेश पांडे ने प्रभावी ढंग से किया। कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि यदि युवा सही दिशा, अनुशासन, नवाचार और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ें, तो वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना निश्चित रूप से साकार किया जा सकता है।
यह आयोजन युवाओं को प्रेरित करने के साथ-साथ यह भी स्पष्ट करता है कि विकसित भारत का निर्माण एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।













