‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में लालू-राबड़ी को झटका, दस्तावेज मांगने की याचिका खारिज

नई दिल्ली। राजधानी की विशेष अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख Lalu Prasad Yadav और उनकी पत्नी Rabri Devi को बड़ा कानूनी झटका देते हुए ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में उनकी याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में उन्होंने जांच एजेंसियों द्वारा जब्त लेकिन मुकदमे में उपयोग न किए गए दस्तावेजों की मांग की थी।
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश Vishal Gogne ने अपने 35 पन्नों के आदेश में इस याचिका को ‘स्व-सेवा’ (self-serving) बताते हुए कहा कि यह मुकदमे की कार्यवाही में देरी करने का प्रयास प्रतीत होती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपियों को पहले ही ऐसे दस्तावेजों का निरीक्षण करने का पर्याप्त अवसर दिया जा चुका है।
कोर्ट ने कहा कि बचाव पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि ट्रायल के इस चरण में अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता क्यों है। न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि 1,675 ‘अनरिलेयड डॉक्युमेंट्स’ की मांग करना आपराधिक प्रक्रिया के खिलाफ है और इससे ट्रायल की गति प्रभावित होगी।
मामले में जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) ने भी याचिका का विरोध किया। अभियोजन पक्ष की ओर से दलील दी गई कि एक वर्ष पहले ही आरोपियों को अप्रयुक्त दस्तावेजों की सूची दे दी गई थी, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन से दस्तावेज उनके बचाव के लिए जरूरी हैं।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि ये दस्तावेज वादामाफ गवाहों (एप्रूवर्स) से जिरह के लिए आवश्यक हैं, लेकिन अदालत ने इसे पर्याप्त आधार नहीं माना। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी पक्ष अपनी शर्तों पर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर सकता और ट्रायल को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं खींचा जा सकता।
गौरतलब है कि 9 जनवरी को इसी अदालत ने लालू यादव, राबड़ी देवी और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए थे। आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने नौकरी के बदले जमीन लेने का कथित घोटाला किया।
सीबीआई ने यह मामला 18 मई 2022 को दर्ज किया था, जिसमें आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियां देने के बदले उम्मीदवारों से जमीनें अपने परिवार और करीबियों के नाम करवाई गईं। इस मामले में Enforcement Directorate (ED) भी जांच कर रही है।
इस ताजा फैसले के बाद अब साफ हो गया है कि अदालत इस मामले में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त करने के पक्ष में नहीं है। आने वाले दिनों में गवाहों के बयान और ट्रायल की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है।













