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अपने ही बुने जाल में उलझा भू- कारोबारी

सरकारी जमीन को बना दिया अपना,सचेत हो प्रशासन, गड़ेरिया-डगा की जमीन पर हेराफेरी का खुलासा

सिंगरौली। जिले के बरगवां तहसील अंतर्गत ग्राम गड़ेरिया और डगा में शासकीय जमीन की हेराफेरी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। वर्षों से सरकारी जमीन को निजी बताकर खरीद-फरोख्त का खेल खेलने वाले भू कारोबारी अब खुद अपने ही दावों में उलझते नजर आ रहे हैं। राजस्व विभाग की सख्ती और दस्तावेजों की पड़ताल ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है, जिससे भू माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।


सूत्रों की बातों पर गौर करें तो पूरा विवाद गड़ेरिया के खसरा क्रमांक 8 और डगा के खसरा क्रमांक 2157 को लेकर खड़ा हुआ है। भू कारोबारियों का दावा है कि गड़ेरिया में जिस जमीन पर बाउंड्रीवाल खड़ी की गई है, वह असल में डगा गांव की जमीन है। लेकिन इसी दावे ने अब उनके लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। यदि यह मान लिया जाए कि डगा की जमीन गड़ेरिया के बीचों-बीच स्थित है, तो फिर महज 100 मीटर दूर स्थित खसरा क्रमांक 33, जहां पेट्रोल पंप संचालित हो रहा है, वह गड़ेरिया की जमीन कैसे हो सकती है। यह सवाल अब पूरे मामले की जड़ बन गया है। सूत्रों के अनुसार इन दोनों रकबों में से एक निश्चित रूप से मध्य प्रदेश शासन की जमीन है, जिसे कागजों में हेरफेर कर निजी दिखाने का प्रयास किया गया। लंबे समय से चली आ रही इस गड़बड़ी को अब राजस्व विभाग ने गंभीरता से लिया है। बरगवां तहसील कार्यालय द्वारा कई संदिग्ध जमीनों पर बेदखली आदेश जारी किए जा चुके हैं, जिससे भू कारोबारियों के मंसूबों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। इधर बता दें कि प्रशासन का स्पष्ट रुख है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यही वजह है कि अब सीमांकन की प्रक्रिया तेज करने के साथ ही रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि जांच के दौरान और भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं, जिससे इस पूरे भू-घोटाले की परतें खुलेंगी।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल गड़ेरिया स्थित पेट्रोल पंप को लेकर भी उठ रहा है। यदि भू कारोबारियों के दावों को ही आधार माना जाए, तो पेट्रोल पंप की जमीन भी विवाद के घेरे में आ सकती है। ऐसे में आने वाले समय में इसका संचालन प्रभावित होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

राजस्व अमले के लिए चुनौती

इधर सूत्रों की बातों पर गौर करें तो एसडीएम से लेकर बरगवां तहसीलदार ने भी माना है कि सरकारी जमीन में अतिक्रमण किया गया है। बेदखली आदेश जारी होने के बाद बेदखल क्यों नहीं किया गया। यह भी बड़ा सवाल है। यह स्थिति प्रशासन के लिए भी चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है, क्योंकि इसमें बड़े आर्थिक हित जुड़े होने की संभावना जताई जा रही है। इधर प्रशासनिक सख्ती और लगातार हो रही कार्रवाई से भू कारोबारियों में खलबली मची हुई है। अब वे अपने बचाव के लिए नए-नए तर्क खोज रहे हैं, लेकिन राजस्व विभाग के पुख्ता दस्तावेज और जमीनी हकीकत उनके दावों की पोल खोल रहे हैं।

अपने ही जाल में फंस रहा भू-माफिया

हालात यह हैं कि जो जाल उन्होंने खुद तैयार किया था, उसी में अब फंसते जा रहे हैं।
संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर सीमांकन और अन्य कठोर कार्रवाई करेगी। यदि ऐसा होता है, तो न केवल अवैध कब्जों पर बुलडोजर चल सकता है, बल्कि इस पूरे मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी तेज हो सकती है। जिले में यह मामला अब एक बड़े भू-घोटाले के रूप में उभरता जा रहा है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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