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इलाज या कारोबार? सिंगरौली में निजी अस्पतालों पर गंभीर सवाल

बाथरूम के पास इलाज, आयुष्मान में गड़बड़ी और महंगे बिल के आरोप; मरीजों ने उठाई जांच की मांग

सिंगरौली। जिले में निजी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तेजी से बढ़ते निजी अस्पतालों के बीच मरीजों ने आर्थिक शोषण, अव्यवस्था और सुविधाओं की कमी जैसे आरोप लगाए हैं। खास तौर पर वंदना हॉस्पिटल को लेकर कई शिकायतें सामने आई हैं, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर बहस छेड़ दी है।

बाथरूम के पास इलाज, संक्रमण का खतरा
मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में स्वच्छता का स्तर बेहद खराब है। कुछ मामलों में शौचालय के पास ही बेड लगाकर मरीजों को ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है। इससे न केवल बदबू की समस्या है, बल्कि संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है। परिजनों का कहना है कि यह स्वास्थ्य मानकों का खुला उल्लंघन है।

शिकायत पर नहीं मिल रहा संतोषजनक जवाब
मरीजों ने डॉक्टरों और स्टाफ के व्यवहार पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शिकायत करने पर उचित जवाब नहीं दिया जाता, बल्कि कई बार नाराजगी झेलनी पड़ती है। इससे मरीज और उनके परिजन मानसिक तनाव में हैं।

आयुष्मान योजना में अनियमितता के आरोप
आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज को लेकर भी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। परिजनों का कहना है कि कार्ड होने के बावजूद पहले नकद राशि जमा कराई जाती है और बाद में योजना का उपयोग दिखाया जाता है, जो नियमों के विपरीत है।

दवाइयों के बिल पर भी सवाल
दवाइयों की बिलिंग को लेकर भी पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। आरोप है कि महंगी दवाइयों का बिल बनाया जाता है, जबकि वास्तविक उपयोग कम होता है। इससे मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील सेवा में लापरवाही और शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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