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बहुमत न होने पर सबसे बड़े दल को बुलाना राज्यपाल की जिम्मेदारी: पी. चिदंबरम

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर बढ़ी सियासी हलचल, कांग्रेस ने टीवीके को दिया समर्थन

नई दिल्ली। P. Chidambaram ने तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर जारी राजनीतिक हलचल के बीच बड़ा बयान दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने कहा कि यदि विधानसभा चुनाव में किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो राज्यपाल का संवैधानिक दायित्व होता है कि वह सबसे बड़े दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करे।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में उन्होंने कहा कि निर्वाचित सदस्यों की संख्या के आधार पर सबसे बड़ी पार्टी के नेता को सरकार गठन का मौका दिया जाना चाहिए। उन्होंने इसे संसदीय परंपरा और स्थापित राजनीतिक नियम बताया।

चिदंबरम ने कहा कि विधानसभा ही वह उचित मंच है जहां कोई दल बहुमत साबित कर सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 1994 के ऐतिहासिक फैसले [1994 (3) SCC 1] का भी उल्लेख किया। उन्होंने तमिलनाडु की उन राजनीतिक पार्टियों की सराहना की जिन्होंने इस संसदीय परंपरा का समर्थन किया है।

गौरतलब है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी Vijay की Tamilaga Vettri Kazhagam (टीवीके) ने 108 सीटें जीती हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे अभी और विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।

इधर कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का औपचारिक ऐलान कर दिया है, जिससे तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं।

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