वैश्विक संकट के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत : निर्मला सीतारमण
“डर फैलाने से जनता का विश्वास कमजोर होता है”, एमएसएमई के लिए कई बड़ी घोषणाएं

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सोमवार को कहा कि वैश्विक अस्थिरता और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश में निराशा और डर का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि जरूरत लोगों में विश्वास पैदा करने की है।
सिडबी के स्थापना दिवस कार्यक्रम में संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति को लेकर “निराशावादी और संशयवादी” दृष्टिकोण फैलाया जा रहा है, जो आम नागरिकों की मेहनत और उपलब्धियों को नजरअंदाज करता है। उन्होंने कहा कि हाई-फ्रीक्वेंसी आर्थिक संकेतक बताते हैं कि देश में घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है।
सीतारमण ने बताया कि सितंबर 2025 में ब्याज दरों में कटौती के बावजूद जीएसटी संग्रह मजबूत रहा है। खुदरा बाजार, कृषि क्षेत्र और एमएसएमई सेक्टर में वाहन बिक्री तथा ऋण वृद्धि भी सकारात्मक बनी हुई है। उन्होंने सीआईआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सितंबर 2025 में निजी क्षेत्र के खर्च में सालाना आधार पर 67 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मार्च तिमाही में कंपनियों का लाभ मार्जिन उच्च स्तर पर पहुंचा।
हालांकि उन्होंने माना कि मध्य पूर्व के संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतों, शिपिंग लागत और निर्यात पर दबाव बढ़ सकता है। इसके बावजूद भारत की व्यापक आर्थिक बुनियाद मजबूत है।
वित्त मंत्री ने एमएसएमई क्षेत्र के लिए कई अहम घोषणाएं भी कीं। उन्होंने बताया कि सिडबी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के बीच को-लेंडिंग प्लेटफॉर्म शुरू किया जाएगा, जिससे छोटे उद्योगों को ऋण सुविधा आसान होगी। साथ ही सीजीटीएमएसई योजना के तहत 5 लाख रुपए तक का बिना गारंटी ऋण देने के लिए विशेष माइक्रो क्रेडिट कार्ड शुरू किया गया है।
उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने ईसीएलजीएस 5.0 को मंजूरी दी है, जिसके तहत एमएसएमई क्षेत्र को 2.55 लाख करोड़ रुपए तक का ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा। साथ ही पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती के कारण सरकार को वित्त वर्ष 2027 में लगभग 1 लाख करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान का अनुमान है।













