मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा मामले में सास गिरीबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द की

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मामले में निचली अदालत द्वारा आरोपी सास और पूर्व जज गिरीबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद आरोपी को गुरुवार को गिरफ्तार किया जा सकता है।
मामले का संक्षिप्त विवरण यह है कि 9 दिसंबर 2025 को त्विशा शर्मा का विवाह आरोपी के बेटे समर्थ सिंह के साथ हुआ था। लगभग पांच महीने बाद 12 मई 2026 को ससुराल में संदेहास्पद परिस्थितियों में फांसी लगने से त्विशा की मौत हो गई। भोपाल की सत्र अदालत ने 15 मई 2026 को आरोपी सास को अग्रिम जमानत दे दी थी, जिसे मृतका के पिता नवनिधि शर्मा और जांच एजेंसी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकल पीठ ने मामले के तथ्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आरोपी के आचरण को देखते हुए निचली अदालत के आदेश को कानूनन गलत माना और उसे खारिज कर दिया। वर्तमान में मामले की जांच दिल्ली पुलिस स्थापना और सीबीआई की विशेष टीम द्वारा की जा रही है।
प्रताड़ना और गर्भपात का दबाव
केस डायरी और गवाह बयानों के अनुसार, शादी के कुछ समय बाद ही त्विशा को उसके पति और सास द्वारा दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। जब ससुराल वालों को उसकी गर्भावस्था का पता चला, तो उन्होंने उस पर मानसिक दबाव डालकर गर्भपात कराने को कहा। मृतका ने अपने परिजनों को वॉट्सऐप संदेश भेजे थे, जिसमें उसने साफ लिखा था कि ससुराल वाले उसे न तो शांति से रहने दे रहे हैं और न ही मायके जाने दे रहे हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर चोटें और छेड़छाड़ की आशंका
एम्स भोपाल में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, मृतका के शरीर पर फांसी के अलावा छह अन्य गंभीर चोटें पाई गईं, जो मौत से पहले किसी भारी बल के प्रयोग के कारण लगी थीं। अभियोजन ने आरोप लगाया कि आरोपी ने डिजिटल तकनीक और सिग्नेचर का प्रयोग कर घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश की।
अग्रिम जमानत निरस्त करने के कड़े आधार
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि निचली अदालत ने केस डायरी और गवाह बयानों को अनदेखा कर जल्दबाजी में जमानत दे दी। अग्रिम जमानत मिलने के बाद आरोपी ने जांच एजेंसी के नोटिसों पर कभी सहयोग नहीं किया। अदालत ने निष्पक्ष जांच और कस्टोडियल इंटरोगेशन की आवश्यकता को देखते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दी।
इस निर्णय के बाद केस में जांच और कार्रवाई को गति मिलने की संभावना है और आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।













