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जबलपुर के सीवेज प्रबंधन पर एनजीटी सख्त, 6 सप्ताह में मांगी जवाबदेही

करोड़ों लीटर गंदा पानी नालों और नदियों में, नगर निगम व प्रदूषण बोर्ड को नोटिस

जबलपुर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने जबलपुर में सीवेज प्रबंधन की खराब स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए नगर निगम और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फटकार लगाई है। ट्रिब्यूनल ने पाया कि शहर में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में बिना उपचारित सीवेज वर्षा जल नालों और नदी तंत्र में छोड़ा जा रहा है, जिससे पर्यावरण और जल स्रोतों पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

एनजीटी के अध्यक्ष Prakash Shrivastava और विशेषज्ञ सदस्य Afroz Ahmad की पीठ ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जबलपुर नगर निगम तथा मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) को छह सप्ताह के भीतर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।

174 एमएलडी सीवेज, उपचार क्षमता केवल 76.5 एमएलडी

सुनवाई के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार जबलपुर में प्रतिदिन लगभग 174 मिलियन लीटर सीवेज उत्पन्न हो रहा है, जबकि उपचार की क्षमता मात्र 76.5 एमएलडी है। परिणामस्वरूप करीब 97.5 एमएलडी गंदा पानी बिना उपचार के शहर के छह प्रमुख नालों में छोड़ा जा रहा है।

एनजीटी ने इसे पर्यावरणीय मानकों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि इस स्थिति को तत्काल रोकना आवश्यक है।

सीवर नेटवर्क से अब भी वंचित कई इलाके

ट्रिब्यूनल ने नगर निगम की रिपोर्ट की समीक्षा के दौरान पाया कि शहर का बड़ा हिस्सा अभी भी मुख्य सीवर नेटवर्क से नहीं जुड़ पाया है। निगम ने अमृत 2.0 योजना के तहत शेष क्षेत्रों में सीवरेज व्यवस्था विकसित करने की बात कही, लेकिन एनजीटी ने स्पष्ट किया कि केवल योजनाओं की स्वीकृति पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका समयबद्ध क्रियान्वयन भी सुनिश्चित होना चाहिए।

ग्रीन बफर जोन और अतिक्रमण पर मांगी रिपोर्ट

एनजीटी ने नालों के किनारे ग्रीन बफर जोन विकसित करने, अवैध अतिक्रमण हटाने और पौधारोपण संबंधी राज्य सरकार की गाइडलाइन के पालन पर भी सवाल उठाए हैं। नगर निगम को इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

11 प्रमुख तालाबों की स्थिति पर भी चिंता

ट्रिब्यूनल ने शहर के 11 प्रमुख तालाबों और जलाशयों के संरक्षण को लेकर भी जानकारी मांगी है। प्रशासन से तालाबों के मूल क्षेत्रफल, अतिक्रमण की स्थिति और उनके पुनर्जीवन के लिए उठाए गए कदमों का पूरा विवरण प्रस्तुत करने को कहा गया है।

नर्मदा नदी पर बढ़ता प्रदूषण का खतरा

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि शहर के कई प्रमुख नालों का प्रदूषित पानी परियट और हिरण नदियों के माध्यम से अंततः Narmada River में पहुंचता है। एनजीटी ने कहा कि नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए तत्काल और समन्वित प्रयास जरूरी हैं।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जल गुणवत्ता जांच के निर्देश

ट्रिब्यूनल ने एमपीपीसीबी को सभी प्रमुख नालों, जलाशयों और नर्मदा नदी के प्रभावित क्षेत्रों में जल गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच करने तथा स्वतंत्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

वहीं, नगर निगम ने दावा किया है कि शहर के सभी 12 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) संचालित हैं और भविष्य में उपचारित जल के पुनः उपयोग, टर्शियरी ट्रीटमेंट सिस्टम तथा बड़े पैमाने पर पौधारोपण की योजना पर काम किया जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एनजीटी की सख्ती के बाद आगामी छह सप्ताह में प्रशासन जमीनी स्तर पर क्या ठोस कदम उठाता है।

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