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रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, आरबीआई ने दर 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखी

 

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और महंगाई के बढ़ते जोखिमों के बीच रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। साथ ही आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए देश की आर्थिक विकास दर (जीडीपी) का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है, जबकि खुदरा महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया गया है।

रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से होम लोन, वाहन ऋण और अन्य कर्जों की ब्याज दरों पर फिलहाल असर नहीं पड़ेगा। इससे लाखों ऋणधारकों की मासिक किस्त (ईएमआई) में भी कोई परिवर्तन नहीं होगा। आरबीआई ने अपने मौद्रिक नीति रुख को ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है, जिससे भविष्य में आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार नीतिगत दरों में बदलाव की संभावना बनी रहेगी।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं। इन परिस्थितियों के कारण महंगाई बढ़ने का खतरा बना हुआ है। अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 3.48 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसमें खाद्य वस्तुओं तथा सोना-चांदी की कीमतों में वृद्धि का प्रमुख योगदान रहा।

विशेषज्ञों के अनुसार रेपो रेट स्थिर रहने से रियल एस्टेट क्षेत्र को राहत मिलेगी। होम लोन की लागत नहीं बढ़ने से आवासीय संपत्तियों की मांग बनी रह सकती है और खरीदारों का विश्वास मजबूत होगा। हालांकि निर्माण सामग्री और श्रम लागत में बढ़ोतरी के कारण डेवलपर्स पर दबाव बना हुआ है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है, रुपये पर दबाव बढ़ता है या महंगाई अपेक्षा से अधिक बढ़ती है तो आने वाले समय में आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर विचार कर सकता है। फिलहाल केंद्रीय बैंक ने आर्थिक विकास और महंगाई नियंत्रण के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति अपनाई है।

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