समय-सीमा में सीमांकन प्रकरणों का निराकरण नहीं करने पर आठ राजस्व अधिकारियों पर अर्थदंड

सिंगरौली। मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 के तहत निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का निराकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर गौरव बैनल ने राजस्व अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की है। सीमांकन संबंधी आवेदनों का समय-सीमा में निराकरण नहीं किए जाने पर जिले के विभिन्न तहसीलों में पदस्थ आठ तहसीलदार एवं नायब तहसीलदारों पर अर्थदंड अधिरोपित किया गया है।
कलेक्टर द्वारा लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कई मामलों में सीमांकन संबंधी प्रकरणों का निराकरण निर्धारित अवधि के भीतर नहीं किया गया। इसे अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई।
जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 की धारा-4 तथा धारा 5(1) एवं 5(2) के तहत प्रत्येक अधिकारी पर 500-500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिन अधिकारियों पर अर्थदंड अधिरोपित किया गया है, उनमें कोरावल के नायब तहसीलदार ज्ञानेंद्र साकेत, सरई के प्रभारी तहसीलदार धर्म प्रकाश मिश्रा, सासन के नायब तहसीलदार राजेंद्र बंसल, देवसर के तहसीलदार ऋषि नारायण सिंह, निवास के नायब तहसीलदार अमित मिश्रा, माड़ा की तहसीलदार जाह्नवी शुक्ला, चितरंगी के तहसीलदार नागेश्वर पनिका तथा माड़ा तहसील के मकरोहर वृत्त की नायब तहसीलदार प्रतीक्षा सिंह शामिल हैं।
कलेक्टर गौरव बैनल ने सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया है कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों का निराकरण निर्धारित समय-सीमा में करना सुनिश्चित करें। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि किसी भी अधिकारी द्वारा सेवाओं के प्रदाय में लापरवाही बरती गई तो नियमानुसार और अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई को समयबद्ध सेवा वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा आम नागरिकों को त्वरित राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।













