बड़ी कार्रवाई: तीन संतान होने पर सिंगरौली के उप पंजीयक अशोक परिहार बर्खास्त, करोड़ों की स्टाम्प चोरी का भी था आरोप

सिंगरौली: मध्य प्रदेश सरकार ने शासकीय सेवा के नियमों का उल्लंघन करने और गंभीर अनियमितताओं के आरोपों से घिरे सिंगरौली के उप पंजीयक (Sub-Registrar) श्री अशोक सिंह परिहार पर अब तक की सबसे बड़ी गाज गिराई है। महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, मध्य प्रदेश द्वारा जारी एक कड़े आदेश के तहत, ‘तीन संतान’ होने का दोष सिद्ध होने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से पूरी तरह बर्खास्त कर दिया गया है।
नियमों की अनदेखी पड़ी भारी
विभागीय आदेश के अनुसार, अशोक सिंह परिहार की तीसरी संतान (पुत्र अभिषेक सिंह) का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। सिंगरौली कलेक्टर द्वारा गठित संयुक्त जांच समिति के प्रतिवेदन में इस बात की पुष्टि हुई थी। मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम, 1961 के प्रावधानों के मुताबिक, 26 जनवरी 2001 के बाद दो से अधिक जीवित संतान होने पर कोई भी उम्मीदवार या कर्मचारी शासकीय सेवा के योग्य नहीं माना जाता है। परिहार ने नियमों की अज्ञानता का तर्क देकर बचने का प्रयास किया, जिसे विभाग ने सिरे से खारिज कर दिया।
करोड़ों की स्टाम्प चोरी और रसूख का विवाद
इस मामले का एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि सिंगरौली में लगभग 8 वर्षों से जमे उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार का विवादों से पुराना नाता रहा है। उन पर एक करोड़ दस लाख रुपये से अधिक की स्टाम्प चोरी करने का भी गंभीर आरोप लगा था, जिसके चलते उन्हें पूर्व में निलंबित किया गया था। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय था कि भारी राजनीतिक रसूख और ऊंची पहुंच के कारण वे न सिर्फ बहाल हुए, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर दोबारा सिंगरौली में ही मलाईदार पद पर काबिज होने में कामयाब रहे।
जनता और विभाग में था भारी आक्रोश
लंबे समय से सिंगरौली में जमे परिहार के खिलाफ स्थानीय लोगों, वकीलों और दस्तावेज़ लेखकों में भारी नाराजगी और शिकायतों का माहौल था। उन पर भ्रष्टाचार और मनमानी के कई आरोप लग रहे थे। अब ‘तीन संतान’ के इस कानूनी फंदे में फंसने के बाद, सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। सरकार की इस सख्त कार्रवाई से रसूखदार अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।













