मानवता का अनुपम उदाहरण: त्याग से भी आगे

मनोज शर्मा,चंडीगढ़ । कर्तव्य, त्याग और मानवता का एक अत्यंत प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए, देश की उत्तरी एवं पूर्वी सीमाओं पर तैनात दो सैनिक भाइयों ने अपनी 70 वर्षीय माताजी, श्रीमती माया देवी, जिन्हें कमांड हॉस्पिटल, चंडीमंदिर में ब्रेन स्ट्रोक के कारण ब्रेन डेड घोषित किया गया था, के अंगदान का निर्णय लिया।
अपार व्यक्तिगत शोक के बावजूद नायब सूबेदार तिलक राज और हवलदार जगदेव सिंह ने अपनी माताजी के अंगदान के माध्यम से कई लोगों के जीवन में नई आशा का संचार किया। उनका यह निर्णय भारतीय सेना के सेवा, त्याग और कर्तव्य के शाश्वत मूल्यों का जीवंत उदाहरण है।
कमांड हॉस्पिटल, पश्चिमी कमान के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आर्मी हॉस्पिटल (आर एंड आर), नई दिल्ली तथा एम्स, नई दिल्ली की चिकित्सा टीमों के साथ समन्वय स्थापित कर अंगों के सफल प्रत्यारोपण हेतु आवश्यक अंग निकासी (ऑर्गन रिट्रीवल) की जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक सम्पन्न किया। अस्पताल की टीम ने इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सर्वोच्च चिकित्सा मानकों का पालन करते हुए परिवार की महान इच्छा का पूर्ण सम्मान सुनिश्चित किया।
सैन्य पुलिस, नागरिक प्रशासन तथा स्थानीय प्रशासन के सहयोग से ग्रीन कॉरिडोर स्थापित किया गया, जिससे अंगों को निर्धारित प्रत्यारोपण केंद्रों तक समयबद्ध, सुरक्षित और निर्बाध रूप से पहुंचाया जा सका।
इन वीर सैनिकों एवं उनके परिवार ने गहन शोक की घड़ी में भी अंगदान जैसे महान और परोपकारी निर्णय के माध्यम से त्याग, धैर्य और निस्वार्थ सेवा की सर्वोच्च मिसाल प्रस्तुत की है। उनका यह प्रेरणादायक कदम न केवल अनेक लोगों को नया जीवन प्रदान करेगा, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और हजारों लोगों को इस पुण्य कार्य के लिए प्रेरित करने का भी माध्यम बनेगा।













