कैलाश मानसरोवर यात्रा: बाढ़ के बाद 77 प्रतिभागी और 3 स्वयंसेवक अब भी लापता, नेपाल व चीन के संपर्क में ईशा फाउंडेशन

नई दिल्ली। नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई विनाशकारी बाढ़ को दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 77 प्रतिभागी और 3 स्वयंसेवक अभी भी लापता हैं। ईशा फाउंडेशन ने स्थिति को लेकर नया अपडेट जारी करते हुए बताया कि वह प्रभावित परिवारों की सहायता और लापता लोगों की तलाश के लिए चीनी, भारतीय और नेपाली अधिकारियों सहित 19 देशों के दूतावासों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है।
राहत व पहचान कार्य जारी, घटनास्थल पर आवाजाही प्रतिबंधित
ईशा सेक्रेड वॉक्स की कोऑर्डिनेटर मां गंभीरी के अनुसार, चीनी और नेपाली अधिकारियों द्वारा फोरेंसिक व बचाव कार्यों के मद्देनजर सीमावर्ती ग्यिरोंग पोर्ट क्षेत्र में आम नागरिकों और निजी संगठनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। चीनी अधिकारियों ने गैर-आधिकारिक कर्मियों को क्षेत्र छोड़ने के निर्देश दिए हैं, जिसके चलते फाउंडेशन के स्वयंसेवक आधिकारिक चैनलों के जरिए स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। लापता व्यक्तियों की पहचान के लिए जरूरी विवरण, तस्वीरें और दस्तावेज खोज एवं बचाव दलों को सौंपे जा चुके हैं।
नेपाली स्वयंसेवकों की टीम जमीन पर सक्रिय
नेपाल में जमीनी स्तर पर समन्वय के लिए लगभग 25 स्थानीय स्वयंसेवकों की टीम तैनात की गई है। यह टीम अस्पतालों, मुर्दाघरों, पुलिस, डीएनए सेंटरों और नेपाली सेना के साथ मिलकर पहचान प्रक्रिया और बचाव कार्यों में सहयोग कर रही है। इसके अलावा, अमेरिकी विदेश विभाग और ग्लोबल अफेयर्स कनाडा जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ भी जानकारी साझा की जा रही है।
निजता का रखा जा रहा ख्याल
ईशा फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों की गोपनीयता और संवेदनाओं का सम्मान करते हुए किसी भी पीड़ित का नाम, फोटो या व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। अधिकारियों से मिलने वाली हर प्रमाणित जानकारी सीधे परिजनों तक पहुंचाई जा रही है। 8 देशों में फाउंडेशन की समर्पित टीमें हेल्पलाइन और ईमेल के माध्यम से 24 घंटे प्रभावित परिजनों की सहायता में जुटी हैं।













