भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत ताकत बना एमएसएमई सेक्टर, जीडीपी में 31 प्रतिशत से अधिक योगदान

नई दिल्ली। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला बनकर उभरा है। विश्व एमएसएमई दिवस से पहले जारी एक आधिकारिक फैक्ट शीट के अनुसार, देश की जीडीपी में एमएसएमई सेक्टर का योगदान 31.1 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया है। इसके साथ ही यह क्षेत्र 38.9 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराकर कृषि के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगारदाता बन गया है।
सरकार के अनुसार, जनवरी 2026 तक एमएसएमई क्षेत्र का विनिर्माण उत्पादन में 35.4 प्रतिशत तथा कुल निर्यात में 48.58 प्रतिशत योगदान रहा। जून 2026 तक उद्यम पंजीकरण पोर्टल और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म पर 8.7 करोड़ से अधिक उद्यमों का पंजीकरण हो चुका है, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं, संस्थागत ऋण और नए बाजारों तक बेहतर पहुंच मिली है।
एमएसएमई को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने बिना गिरवी ऋण की गारंटी सीमा 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी है। वहीं, खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1.27 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है।
सरकार ने बताया कि भुगतान संबंधी विवादों के त्वरित समाधान, डिजिटल क्रेडिट व्यवस्था और तकनीकी सुधारों से एमएसएमई क्षेत्र को नई मजबूती मिली है। सरकार का मानना है कि यह क्षेत्र आर्थिक विकास के साथ-साथ ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उद्यमिता, रोजगार सृजन तथा महिला एवं युवा उद्यमियों को नए अवसर उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।













