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हर बारिश में डूबता एनटीपीसी का मुख्य लेबर गेट, जलभराव से हजारों लोगों की राह मुश्किल

कर्मचारी, छात्र और मरीज रोजाना हो रहे परेशान, स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था नहीं होने पर बढ़ा आक्रोश

सिंगरौली। बरसात शुरू होते ही एनटीपीसी विन्ध्यनगर टाउनशिप के मुख्य लेबर गेट पर जलभराव की समस्या एक बार फिर विकराल रूप ले चुकी है। विन्ध्यनगर-शक्तिनगर मुख्य मार्ग पर सड़क पर कई फीट तक पानी भर जाने से प्रतिदिन हजारों कर्मचारियों, स्कूली विद्यार्थियों, स्थानीय नागरिकों और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्षों पुरानी इस समस्या का अब तक स्थायी समाधान नहीं होने से लोगों में प्रबंधन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

यह मार्ग एनटीपीसी में कार्यरत हजारों कर्मचारियों के आवागमन का प्रमुख रास्ता होने के साथ ही शक्तिनगर, वाराणसी एवं आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग भी है। बारिश के दौरान सड़क पर जलभराव होने से दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक जोखिम उठाना पड़ता है। फिसलन और गड्ढों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इसी मार्ग से प्रतिदिन स्कूली बच्चे भी गुजरते हैं। पानी भर जाने के कारण बच्चों को जलभराव के बीच होकर निकलना पड़ता है, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। वहीं आसपास के वार्डों के लोगों को भी अपने दैनिक कार्यों के लिए लंबा चक्कर लगाकर आवागमन करना पड़ता है।

क्षेत्रवासियों ने बताया कि गंभीर मरीजों को वाराणसी सहित अन्य बड़े अस्पतालों में ले जाने के लिए भी यही मुख्य मार्ग उपयोग में आता है। ऐसे में जलभराव के कारण एम्बुलेंस की आवाजाही प्रभावित होने का खतरा बना रहता है, जो किसी भी आपात स्थिति में गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।लोगों का आरोप है कि एनटीपीसी टाउनशिप के विकास पर करोड़ों रुपये खर्च करता है, लेकिन जल निकासी जैसी बुनियादी समस्या की अनदेखी की जा रही है। संबंधित वार्ड के पार्षद द्वारा भी कई बार प्रबंधन को पत्र लिखकर स्थायी नाला निर्माण और ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने की मांग की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

क्षेत्रवासियों ने एनटीपीसी प्रबंधन से मांग की है कि बरसात के मौसम को देखते हुए तत्काल प्रभाव से जल निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते वैज्ञानिक और दीर्घकालिक समाधान नहीं किया गया तो किसी भी बड़ी दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रबंधन की होगी।

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