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पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी पत्नी को भी मिलेगी फैमिली पेंशन, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

 

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक पेंशन को लेकर एक महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाते हुए कहा है कि पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी पत्नी को भी फैमिली पेंशन का अधिकार मिलेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि पहली पत्नी के जीवित रहते किया गया दूसरा विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत भले ही अवैध माना जाए, लेकिन केवल इसी आधार पर दूसरी पत्नी को सामाजिक सुरक्षा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ ने कहा कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 एक कल्याणकारी कानून है, जिसकी व्याख्या सामाजिक सुरक्षा की भावना के अनुरूप उदारतापूर्वक की जानी चाहिए। अदालत ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा 4 सितंबर 2021 को जारी उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें दूसरी पत्नी अन्नपूर्णा पांडेय की पारिवारिक पेंशन की मांग खारिज कर दी गई थी।

मामला दिवंगत सहायक लेखाकार मनोकांत पांडेय से जुड़ा है। उनके निधन के बाद पहली पत्नी पुष्पलता उपाध्याय को फैमिली पेंशन मिली, जबकि दूसरी पत्नी अन्नपूर्णा पांडेय को भविष्य निधि की राशि और अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी। वर्ष 2020 में पहली पत्नी के निधन के बाद अन्नपूर्णा ने पेंशन का दावा किया, जिसे विश्वविद्यालय ने अस्वीकार कर दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि जब विभाग स्वयं अन्नपूर्णा पांडेय को कर्मचारी की पत्नी मानकर अनुकंपा नियुक्ति दे चुका है और पहली पत्नी के निधन के बाद कोई अन्य दावेदार भी नहीं बचा है, तो उन्हें फैमिली पेंशन से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने विश्वविद्यालय को 12 सप्ताह के भीतर फैमिली पेंशन, एरियर तथा सभी परिणामी लाभ प्रदान करने का निर्देश दिया है। यह फैसला पारिवारिक पेंशन संबंधी मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।

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