कमाने वाली पत्नी भी उठाएगी घर और बच्चे की जिम्मेदारी: बॉम्बे हाईकोर्ट, मेंटेनेंस आधा किया

मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि पति और पत्नी दोनों कमाने वाले हैं, तो घर चलाने और बच्चे की परवरिश का आर्थिक दायित्व भी दोनों का समान रूप से होना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि समानता का अधिकार केवल अपनी सुविधा के अनुसार नहीं अपनाया जा सकता।
जस्टिस एम.एम. सताये की एकल पीठ ने एक पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए फैमिली कोर्ट के जनवरी 2025 के आदेश में संशोधन किया और पत्नी व नाबालिग बेटे के लिए निर्धारित ₹50,000 मासिक मेंटेनेंस को घटाकर ₹25,000 प्रति माह कर दिया।
मामले में पति ने हाईकोर्ट को बताया कि वह दो मकानों की ईएमआई चुका रहा है। एक मकान मुंबई के अंधेरी में है, जहां पत्नी और बेटा रह रहे हैं, जबकि दूसरा नवी मुंबई के पनवेल में है। पति स्वयं बिहार में नौकरी कर रहा है। उसका कहना था कि पत्नी भी नौकरी करती है, लेकिन न तो ईएमआई में कोई आर्थिक योगदान देती है और न ही खर्च का बोझ साझा करती है।
पति ने अदालत को यह भी बताया कि उसने पत्नी से बिहार आकर साथ रहने या कम से कम पनवेल स्थित घर में शिफ्ट होने का अनुरोध किया था, ताकि आर्थिक बोझ कम हो सके। हालांकि पत्नी ने दोनों प्रस्तावों से इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि पति की दलीलों में दम है। अदालत ने कहा कि यदि पत्नी अंधेरी जैसे महंगे इलाके में रहना चाहती है और स्वयं आवास संबंधी खर्च में कोई योगदान नहीं देती, तो पति पर पूरा आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं होगा।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जब पति-पत्नी दोनों आय अर्जित करते हों और बच्चे को बेहतर शिक्षा व जीवन देना चाहते हों, तो उसके खर्च की जिम्मेदारी भी दोनों को मिलकर उठानी चाहिए। केवल पति से ही सभी खर्चों की अपेक्षा करना समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।













