वरिष्ठता और प्रमोशन विवाद हाईकोर्ट पहुंचा, राज्य सरकार व पीएससी से जवाब तलब
पीएससी उत्तीर्ण डॉक्टर ने लगाया भेदभाव का आरोप, 1989 से सेवा लाभ और प्रोफेसर पद की मांग

जबलपुर। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद वरिष्ठता और पदोन्नति में भेदभाव का आरोप लगाते हुए खंडवा में पदस्थ डॉ. सोमपाल सिंह ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ के समक्ष दायर याचिका में डॉ. सोमपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1991 में पीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन विभाग ने उनकी नियमित सेवा की गणना वर्ष 1994 से की। इससे उनकी वरिष्ठता प्रभावित हुई और पदोन्नति में भी नुकसान उठाना पड़ा।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि डॉ. अविनाश दुबे को पीएससी परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना ही वर्ष 1989 से नियमित सेवा का लाभ देते हुए वरिष्ठता और वर्ष 2006 में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति प्रदान कर दी गई। डॉ. सोमपाल सिंह का कहना है कि समान परिस्थितियों में उनके साथ अलग व्यवहार किया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से वर्ष 1989 से नियमित सेवा मानकर वरिष्ठता का लाभ देने तथा वर्ष 2006 से प्रोफेसर पद पर पदोन्नति का लाभ प्रदान करने की मांग की है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार, पीएससी और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है।













