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टिकट नहीं मिला तो भी रेलवे को देना होगा 8 लाख मुआवजा

हाईकोर्ट ने कहा- टिकट की अनुपस्थिति से दावा खारिज नहीं हो सकता; देरी पर 9% सालाना ब्याज भी

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने चलती ट्रेन से गिरकर हुई यात्री की मौत के मामले में रेलवे को मृतक की पत्नी को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मृत यात्री के पास से टिकट बरामद न होना अकेले मुआवजा देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकता। निर्धारित समय पर भुगतान नहीं होने की स्थिति में 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की एकलपीठ ने अपील स्वीकार करते हुए रेलवे दावा न्यायाधिकरण के वर्ष 2017 के आदेश को निरस्त कर दिया। ट्रिब्यूनल ने मृतक शिव नारायण सिंह की पत्नी लाली द्वारा दायर मुआवजा दावा खारिज कर दिया था।

2011 में ट्रेन से गिरकर हुई थी मौत

मामले के अनुसार शिव नारायण सिंह 21 नवंबर 2011 को इटावा से दिल्ली जा रही लाल किला एक्सप्रेस में सवार हुए थे। आरोप है कि सराय भूपत रेलवे स्टेशन के पास वे चलती ट्रेन से गिर गए और उनकी मौत हो गई।

रेलवे की ओर से तर्क दिया गया कि मृतक से टिकट बरामद नहीं हुआ था, इसलिए वास्तविक यात्रा साबित नहीं होती। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि टिकट का न मिलना अपने आप में मुआवजे के दावे को समाप्त नहीं करता।

गवाहों की गवाही पर भरोसा

विधवा और एक अन्य गवाह ने अदालत में गवाही दी कि मृतक ने द्वितीय श्रेणी का टिकट खरीदा था। रेलवे इस दावे को खारिज करने के लिए टिकट बिक्री का रिकॉर्ड या कोई अन्य ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।

हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के उस निष्कर्ष को भी खारिज किया, जिसमें शव के तीन टुकड़ों में मिलने के आधार पर यह माना गया था कि मृतक पटरियों पर चल रहा था और ट्रेन की चपेट में आया।

फैसले के अनुसार मृतक की पत्नी को 8 लाख रुपये मुआवजा मिलेगा और भुगतान में देरी होने पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।

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