बड़ी खबरब्रेकिंग न्यूज़मध्य प्रदेशसिंगरौली

मोरवा के विकास को लेकर विधायक रामनिवास शाह के तेवर तल्ख, बोले- कलेक्टर-कमिश्नर को विभाग चलाना नहीं आता तो छुट्टी ले लीजिए

कार्यक्रम में कम भीड़ को लेकर उठे सवाल, हालिया विस्थापन आंदोलन में विधायक की गैरमौजूदगी से जोड़कर देखी जा रही स्थिति; प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर पत्र लिखने की बात

सिंगरौली। सिंगरौली के मोरवा क्षेत्र में विकास और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर रविवार को आयोजित कार्यक्रम में विधायक रामनिवास शाह के तेवर तल्ख नजर आए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जिले के कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह दोनों अधिकारियों को पत्र लिखेंगे। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि अधिकारियों को विभाग चलाना नहीं आता है तो वे छुट्टी ले सकते हैं, इसमें कोई दिक्कत नहीं है।
विधायक के इस बयान के बाद मोरवा क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कार्यक्रम में जिला प्रशासन के प्रमुख अधिकारियों की मौजूदगी नहीं रही। वहीं आम लोगों की उपस्थिति भी अपेक्षाकृत कम दिखाई दी। पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की संख्या भी सीमित रही। ऐसे में कार्यक्रम के दौरान ही कम भीड़ को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं।

विस्थापन आंदोलन की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा कार्यक्रम
मोरवा में हाल ही में एनसीएल की विस्थापन नीति और पुनर्वास से जुड़ी मांगों को लेकर बड़ा आंदोलन हुआ था। 30 सितंबर को संयुक्त मंच के आह्वान पर मोरवा में बाजार बंद रखा गया और बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार, स्थानीय नागरिक और व्यापारी एनसीएल मुख्यालय पहुंचे थे। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार आंदोलन में 45 सूत्रीय मांगें उठाई गई थीं, जिनमें मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
इस आंदोलन में विधायक रामनिवास शाह की गैरमौजूदगी भी स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय रही। अब रविवार के कार्यक्रम में कम संख्या में लोगों की मौजूदगी को कुछ स्थानीय लोग उसी घटनाक्रम से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि कार्यक्रम में लोगों की कम उपस्थिति के कारणों को लेकर आयोजकों अथवा स्थानीय नागरिकों की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इसलिए इसे सीधे तौर पर बहिष्कार या बायकॉट कहना फिलहाल उचित नहीं होगा।

मोरवा के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
विधायक रामनिवास शाह ने कार्यक्रम के दौरान मोरवा क्षेत्र के विकास से जुड़े विषयों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि यदि अधिकारियों के स्तर पर विभागीय कामकाज ठीक ढंग से नहीं चल पा रहा है तो उन्हें अपनी जिम्मेदारी को लेकर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
विधायक ने स्पष्ट किया कि वह इस संबंध में कलेक्टर और कमिश्नर को पत्र लिखेंगे। उनके इस बयान को स्थानीय विकास कार्यों, नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक समन्वय को लेकर उनकी नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है।

15 साल की भाजपा सरकार में विकास पर भी सवाल
विधायक के बयान के बाद राजनीतिक स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि विकास की कमी के लिए लंबे समय तक पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है, लेकिन मध्यप्रदेश में लंबे समय से भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान मोरवा और सिंगरौली की मौजूदा स्थिति को लेकर सवाल क्यों उठ रहे हैं।
हालांकि यह राजनीतिक बहस का विषय है और विकास की स्थिति का आकलन करने के लिए क्षेत्रवार योजनाओं, स्वीकृत परियोजनाओं, उनके क्रियान्वयन और नागरिक सुविधाओं के आंकड़ों को देखना आवश्यक होगा। विधायक का ताजा बयान फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही और मोरवा के विकास से जुड़े मुद्दों को केंद्र में ले आया है।

अब पत्र के बाद कार्रवाई पर नजर
मोरवा में विस्थापन, पुनर्वास और विकास से जुड़े मुद्दे पहले भी सार्वजनिक रूप से उठते रहे हैं। हालिया आंदोलन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की रिपोर्ट सामने आई थी और विस्थापितों ने अपनी मांगों को लेकर एनसीएल प्रबंधन के समक्ष आवाज उठाई थी।
अब विधायक रामनिवास शाह द्वारा कलेक्टर और कमिश्नर को पत्र लिखे जाने की बात सामने आने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पत्र में किन मुद्दों को उठाया जाता है और प्रशासन की ओर से उन पर क्या जवाब या कार्रवाई सामने आती है। साथ ही मोरवा के विकास और विस्थापन से जुड़े सवालों को लेकर स्थानीय लोगों तथा प्रशासन के बीच आगे किस तरह का संवाद स्थापित होता है, इस पर भी नजर रहेगी।

Author

Related Articles

Back to top button