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भ्रष्टाचार की फाइलों पर गरमाई तमिलनाडु की सियासत

सीएम विजय बोले- मुझे मजबूर मत करो, सही समय पर सामने लाऊंगा दो फाइलें

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री कार्यालय के स्थानांतरण और सड़क निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) और विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के बीच टकराव तेज हो गया है। बुधवार को बहस के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने पिछली डीएमके सरकार के कार्यकाल से जुड़ी कथित भ्रष्टाचार की दो फाइलें सार्वजनिक करने की चेतावनी देकर राजनीतिक माहौल गरमा दिया। उन्होंने कहा कि फाइलें उनके पास हैं और उचित समय आने पर उन्हें सामने रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने तीखे अंदाज में कहा कि उन्हें फाइलें सार्वजनिक करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उनका बयान उस समय आया जब विधानसभा में सड़क निर्माण कार्यों में कथित गड़बड़ियों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने थे।

सीएम कार्यालय के स्थानांतरण पर विवाद

विवाद की शुरुआत मुख्यमंत्री कार्यालय को फोर्ट सेंट जॉर्ज स्थित मौजूदा परिसर से हटाकर सचिवालय परिसर में स्थित नामक्कल कविन्यार मालिगई में स्थानांतरित करने की योजना से हुई। डीएमके विधायक ईवी वेलु ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि टेंडर की सूचना अखबार में प्रकाशित हुई, लेकिन आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं कराई गई।

सरकार की ओर से लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुन ने सफाई देते हुए कहा कि स्थानांतरण किसी व्यक्तिगत सुविधा के लिए नहीं, बल्कि बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार मौजूदा कार्यालय में आवश्यक सुविधाओं और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के स्वागत के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।

5.54 करोड़ के टेंडर पर भी सवाल

मुख्यमंत्री कार्यालय के स्थानांतरण के लिए 5.54 करोड़ रुपये का टेंडर भी राजनीतिक विवाद का विषय बना है। सरकार का कहना है कि प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण सभी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए। मंत्री ने यह भी तर्क दिया कि शेड्यूल ऑफ रेट्स पहले सार्वजनिक होने से ठेकेदार कीमतें बढ़ा सकते हैं। सरकार ने मामले में विस्तृत जानकारी वाली श्वेतपत्र रिपोर्ट जारी करने का संकेत दिया है।

दो फाइलों के जिक्र से बढ़ी सियासी हलचल

सड़क निर्माण में कथित अनियमितताओं पर बहस के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने पिछली डीएमके सरकार से जुड़ी दो फाइलों का उल्लेख किया। हालांकि उन्होंने सदन में तत्काल इन फाइलों की विस्तृत जानकारी या उनमें दर्ज आरोप सार्वजनिक नहीं किए।

मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश दे रही है। वहीं डीएमके सरकार के फैसलों में पारदर्शिता और प्रक्रियागत स्पष्टता पर लगातार सवाल उठा रही है।

अब निगाहें उन दो फाइलों पर टिकी हैं, जिनका मुख्यमंत्री ने विधानसभा में जिक्र किया है। यदि सरकार इन्हें सार्वजनिक करती है तो तमिलनाडु की राजनीति में नया विवाद खड़ा होना तय माना जा रहा है। फिलहाल मुख्यमंत्री की चेतावनी ने संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में TVK और डीएमके के बीच भ्रष्टाचार तथा प्रशासनिक फैसलों को लेकर सियासी टकराव और तेज हो सकता है।

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