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गुमशुदगी की याचिका पर हाईकोर्ट पहुंचा पति

पत्नी की भांजी के साथ रहने की बात कबूली, बच्चे की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता पिता

ग्वालियर। पत्नी द्वारा पति के लापता होने की शिकायत के बाद हाईकोर्ट पहुंचा मामला उस समय नया मोड़ ले गया, जब कथित रूप से लापता पति खुद अदालत में पेश हो गया। सुनवाई के दौरान उसने स्वीकार किया कि वह अपनी पत्नी की भांजी के साथ घर से गया था और दोनों ने भोपाल, राजकोट, पनवेल व गोवा सहित कई शहरों में समय बिताया। बाद में दोनों जयपुर में रहने लगे। पति ने स्पष्ट किया कि वह अब पत्नी के साथ वैवाहिक जीवन जारी नहीं रखना चाहता।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की पीठ के समक्ष हुई। पत्नी ने पति के लापता होने के बाद उसकी तलाश के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। लंबे समय तक उसका कोई पता नहीं चलने के बाद सुनवाई के दौरान पति के अचानक अदालत में उपस्थित होने से मामले की दिशा बदल गई।

पुलिस से बचने के लिए बंद किए मोबाइल

पति ने कोर्ट को बताया कि दोनों ने पुलिस की लोकेशन ट्रैकिंग से बचने के लिए पुराने मोबाइल फोन बंद कर दिए थे और नए मोबाइल व सिम का इस्तेमाल किया। उसने यह भी बताया कि नई सिम हासिल करने के लिए कथित तौर पर किसी अन्य व्यक्ति के आधार दस्तावेज का इस्तेमाल किया गया। जयपुर के मानसरोवर क्षेत्र में किराये के मकान में रहने और होटल में डिलीवरी बॉय के रूप में काम करने की जानकारी भी सामने आई।

कई शहरों में घूमने की जानकारी

अदालत में पति ने बताया कि वह पत्नी की भांजी के साथ भोपाल से निकला था। इसके बाद दोनों राजकोट, पनवेल और गोवा पहुंचे और फिर जयपुर में रहने लगे। पुलिस ने सुनवाई के दौरान 14 अगस्त के एक वीडियो का भी उल्लेख किया। पति ने वीडियो में खुद को अपने पिता और दादा के साथ मौजूद होना स्वीकार किया। पुलिस का दावा है कि परिवार के कुछ सदस्यों को उसके ठिकाने की जानकारी थी और इस पहलू की जांच की जा रही है।

पत्नी के साथ नहीं रहना चाहता, बच्चे की जिम्मेदारी जरूरी

पति ने अदालत में कहा कि वह अपनी पत्नी के साथ नहीं रहना चाहता। हालांकि, उसने बच्चे को लेकर अपनी जिम्मेदारी से इनकार नहीं किया। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति-पत्नी के संबंधों को लेकर व्यक्तिगत निर्णय अलग विषय है, लेकिन बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी से पिता मुक्त नहीं हो सकता।

अदालत की टिप्पणी ने मामले को गुमशुदगी से आगे बढ़ाकर बच्चे के अधिकार और अभिभावकीय जिम्मेदारी के महत्वपूर्ण पहलू से जोड़ दिया है। पति का पत्नी के साथ नहीं रहने का निर्णय बच्चे के प्रति उसकी जिम्मेदारी को समाप्त नहीं करता।

अब पुलिस पति के बताए अलग-अलग ठिकानों, यात्रा, मोबाइल व सिम से जुड़े तथ्यों तथा परिवार की संभावित भूमिका की जांच कर सकती है। वहीं मामले में आगे की कार्यवाही में पति-पत्नी के वैवाहिक विवाद के साथ बच्चे की देखभाल और उसके हित को भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।

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