सोलर-बैटरी से ₹5.25 में मिलेगी भरोसेमंद बिजली, 25 साल तक स्थिर रहेगी दर

नई दिल्ली। भारत में सौर और पवन ऊर्जा अब केवल दिन के समय मिलने वाली सस्ती बिजली तक सीमित नहीं रहने वाली है। बैटरी स्टोरेज के साथ नवीकरणीय ऊर्जा को कोयले से बनने वाली बिजली की तरह लगातार और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम सामने आया है। सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) की 1,000 मेगावाट राउंड-द-क्लॉक रिन्यूएबल एनर्जी नीलामी में करीब 5.25 रुपए प्रति यूनिट की दर सामने आई है। खास बात यह है कि यह कीमत 25 साल तक नाममात्र रूप से स्थिर रहने वाली है।
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले स्थित इंडिया एनर्जी एंड क्लाइमेट सेंटर (IECC) के अध्ययन में इस मॉडल की तकनीकी और आर्थिक संभावनाओं का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन के अनुसार बैटरी स्टोरेज की मदद से दिन में पैदा होने वाली सौर बिजली को शाम और रात के समय भी उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे नवीकरणीय ऊर्जा की सबसे बड़ी चुनौती यानी जरूरत के समय बिजली उपलब्ध कराने की समस्या का समाधान संभव है।
पीक समय में 90% क्षमता उपलब्ध कराना जरूरी
SECI की नीलामी सामान्य सौर ऊर्जा परियोजनाओं से अलग है। इसमें बिजली की उपलब्धता को मांग के समय से जोड़ा गया है। उत्पादकों को खरीदार द्वारा निर्धारित छह पीक घंटों में कम से कम 90 प्रतिशत क्षमता उपलब्ध करानी होगी। वहीं सूर्य की रोशनी नहीं होने वाले समय में कम से कम 70 प्रतिशत और सौर घंटों में 50 से 60 प्रतिशत क्षमता उपलब्ध रखने की शर्त है।
बिजली आपूर्ति की निगरानी प्रत्येक 15 मिनट के ब्लॉक में होगी। तय क्षमता से कम बिजली देने पर कॉन्ट्रैक्ट कीमत की 1.5 गुना दर तक जुर्माना लगाया जा सकता है। ऐसे में केवल सोलर पैनल लगाना पर्याप्त नहीं होगा। परियोजना संचालकों को रात और कम धूप के समय भी बिजली उपलब्ध करानी होगी, जिसके लिए बैटरी स्टोरेज अहम भूमिका निभाएगा।
राजस्थान में 3 हजार मेगावाट सोलर क्षमता का मॉडल
IECC के अध्ययन में 10 राज्यों के 10 वर्षों के हर घंटे के मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन के अनुसार राजस्थान जैसे बेहतर सौर संसाधन वाले राज्य में 1,000 मेगावाट की भरोसेमंद नवीकरणीय बिजली उपलब्ध कराने के लिए करीब 3,000 मेगावाट सौर क्षमता और 12 गीगावाट-घंटे बैटरी स्टोरेज का संयोजन प्रभावी हो सकता है।
कम सौर संसाधन वाले या मानसून से अधिक प्रभावित क्षेत्रों में सौर क्षमता की जरूरत 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। हालांकि बैटरी स्टोरेज की आवश्यकता करीब 12 गीगावाट-घंटे के आसपास रह सकती है।
कंपनियों की लगभग समान बोली ने बढ़ाया भरोसा
नीलामी में 16 कंपनियों ने हिस्सा लिया और सात डेवलपरों को क्षमता आवंटित की गई। विजेता बोलियां करीब 5.25 से 5.26 रुपए प्रति यूनिट के बीच रहीं। IECC के विशेषज्ञों के अनुसार कई कंपनियों का लगभग समान दर पर बोली लगाना संकेत देता है कि 5.25 रुपए की कीमत केवल किसी एक कंपनी की आक्रामक बोली नहीं है, बल्कि भरोसेमंद नवीकरणीय बिजली की संभावित बाजार दर का संकेत हो सकती है।
25 साल तक दर स्थिर रहने से बिजली खरीदने वाली कंपनियों को ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम भी कम होगा। महंगाई को ध्यान में रखने पर भविष्य में इस बिजली की वास्तविक लागत और कम हो सकती है।
उद्योगों को मिलेगा बड़ा फायदा
डेटा सेंटर, एल्युमिनियम, स्टील और अन्य ऊर्जा-गहन उद्योगों को चौबीसों घंटे बिजली की जरूरत होती है। ऐसे उद्योगों के लिए स्थिर कीमत पर भरोसेमंद और स्वच्छ बिजली उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है।
भारत में सौर और पवन ऊर्जा क्षमता तेजी से बढ़ी है। अब अगली चुनौती केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि जरूरत के समय बिजली उपलब्ध कराना है। बैटरी स्टोरेज इस अंतर को भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
SECI की नीलामी ने संकेत दिया है कि बैटरी के साथ नवीकरणीय ऊर्जा अब केवल पर्यावरण अनुकूल विकल्प नहीं रह गई है, बल्कि लागत, विश्वसनीयता और दीर्घकालीन कीमत की स्थिरता के मामले में पारंपरिक बिजली को चुनौती देने की स्थिति में पहुंच रही है। बड़े पैमाने पर यह मॉडल लागू हुआ तो आने वाले वर्षों में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज मिलकर भारत की बिजली व्यवस्था में कोयले पर निर्भरता घटाने और स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।













