निकाय चुनाव से पहले अजमेर भाजपा में बगावत! पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत ने छोड़ी पार्टी, देवनानी पर लगाए गंभीर आरोप
राजनीतिक दबाव और कार्रवाई का लगाया आरोप, बोले- झुकूंगा नहीं; देवनानी ने कहा- किसी से कोई व्यक्तिगत मतभेद नहीं

अजमेर। राजस्थान में निकाय चुनाव से पहले अजमेर की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। अजमेर के पूर्व महापौर और नागौर जिला प्रभारी धर्मेंद्र गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने नागौर जिला प्रभारी की जिम्मेदारी से भी खुद को मुक्त करने के लिए पार्टी नेतृत्व को पत्र भेजा है।
इस्तीफे के साथ जारी वीडियो संदेश में गहलोत ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक मतभेदों के चलते उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और स्वायत्त शासन विभाग से उन्हें वर्ष 2015 से 2020 तथा वर्ष 2021 से जुड़े मामलों में नोटिस दिलवाए गए हैं।
गहलोत बोले- दबाव के आगे नहीं झुकूंगा
गहलोत ने कहा कि जिन मामलों को लेकर नोटिस जारी किए गए हैं, उनसे उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने खुद को भाजपा का समर्पित कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि वह नहीं चाहते कि किसी विवाद का असर पार्टी की छवि पर पड़े। इसी कारण उन्होंने भारी मन से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का निर्णय लिया।
उन्होंने देवनानी पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह दबाव के सामने झुकने के बजाय अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। गहलोत ने यह भी संकेत दिया कि दोनों मामलों से जुड़े दस्तावेज और तथ्य जल्द सार्वजनिक कर अपना पक्ष रखेंगे।
13 नक्शों की फाइलों से जुड़ा है विवाद
गहलोत के खिलाफ बताए जा रहे प्रकरणों में अजमेर नगर निगम से जुड़ा मामला भी शामिल है। जानकारी के अनुसार तत्कालीन निगम आयुक्त के अवकाश पर रहने के दौरान महापौर के माध्यम से 13 फाइलों के नक्शे पास किए गए थे। इस मामले में न्यायिक जांच हुई और रिपोर्ट में गहलोत की जिम्मेदारी तय किए जाने की बात सामने आई।
इसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने भी जांच शुरू की थी। अब अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद मामला फिर चर्चा में है। स्वायत्त शासन विभाग ने न्यायिक जांच रिपोर्ट के आधार पर गहलोत को नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में राजस्थान नगर पालिका अधिनियम के तहत उन्हें छह वर्ष तक चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किए जाने के संबंध में जवाब मांगा गया है।
देवनानी ने आरोपों से किया किनारा
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने गहलोत के आरोपों पर कहा कि उनका किसी से कोई व्यक्तिगत मतभेद नहीं है। हालांकि, गहलोत के इस्तीफे के बाद दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक खींचतान एक बार फिर सामने आ गई है।
कांग्रेस ने साधा भाजपा पर निशाना
गहलोत के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने घटनाक्रम को भाजपा के अंदर असंतोष और कथित दबाव की राजनीति से जोड़ते हुए राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा के भीतर ही पूर्व जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नेताओं को लेकर असंतोष सामने आ रहा है।
निकाय चुनाव से ठीक पहले पूर्व महापौर जैसे प्रभावशाली स्थानीय नेता का भाजपा छोड़ना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखना होगा कि गहलोत के इस्तीफे का अजमेर के निकाय चुनाव में भाजपा के समीकरणों पर कितना असर पड़ता है।













