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जोजरी नदी के किनारे 100 मीटर तक निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 500 मीटर दायरे में प्रदूषणकारी गतिविधियां भी प्रतिबंधित

नई दिल्ली/जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की जोजरी नदी और उसके आसपास के पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़ा आदेश दिया है। सोमवार को कोर्ट ने नदी के किनारे से 100 मीटर के दायरे में सभी तरह के निर्माण और विकास कार्यों पर अंतरिम रोक लगा दी। यह प्रतिबंध तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक नदी की बाढ़ सीमा और पर्यावरण सुरक्षा क्षेत्र का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण एवं सीमांकन नहीं हो जाता।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने जोजरी समेत राजस्थान की नदियों में औद्योगिक प्रदूषण से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि नदी और उसके आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र को काफी नुकसान पहुंचा है, इसलिए वैज्ञानिक सीमांकन होने तक निश्चित सुरक्षा क्षेत्र जरूरी है।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि नदी की मौजूदा बाढ़ सीमा से दोनों ओर 500 मीटर के दायरे में ऐसी किसी औद्योगिक गतिविधि या कार्य की अनुमति नहीं होगी, जिससे नदी में प्रदूषण, गंदगी अथवा पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका हो।

मामला एक डॉक्यूमेंट्री के सामने आने के बाद चर्चा में आया था, जिसमें जोधपुर, पाली और बाड़मेर जिलों से गुजरने वाली जोजरी नदी में भारी प्रदूषण की स्थिति सामने आई थी। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी, बांडी और लूनी नदियों की सफाई को लेकर एनजीटी के 2022 के निर्देशों को फिर लागू किया था। साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय पारिस्थितिकी निगरानी समिति भी गठित की गई थी।

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