खाटू श्याम मंदिर: आस्था, इतिहास और संस्कृति का अनोखा संगम

नई दिल्ली
राजस्थान के सीकर जिले के खाटू कस्बे में स्थित खाटू श्याम मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है। यहां पूजे जाने वाले खाटू श्याम जी को महाभारत के वीर योद्धा बर्बरीक का कलियुगीन स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि उनके असाधारण बलिदान के कारण भगवान कृष्ण ने उन्हें यह आशीर्वाद दिया कि कलियुग में वे “श्याम” नाम से पूजे जाएंगे।
मंदिर की स्थापना लगभग 1027 ईस्वी में मानी जाती है, जब रूप सिंह चौहान को स्वप्न में दबी हुई मूर्ति निकालने का संकेत मिला। इसके बाद इस स्थल को पूजा और आध्यात्मिक साधना का प्रमुख केंद्र माना जाने लगा। वर्तमान मंदिर सफेद मकराना संगमरमर से निर्मित है, जिसमें राजस्थानी कला, नक्काशी और पारंपरिक स्थापत्य शैली की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। गर्भगृह में स्थापित श्याम जी की प्रतिमा भक्तों में गहरी श्रद्धा जगाती है।
मंदिर परिसर के पास स्थित श्याम कुंड अत्यंत पवित्र माना जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस कुंड में स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति प्राप्त होती है। इसके पास ही श्याम वाटिका स्थित है, जहाँ से भगवान श्याम को अर्पित करने के लिए फूल तोड़े जाते हैं। इसकी हरियाली, शांत वातावरण और आध्यात्मिक अनुभूति भक्तों के मन को सुकून देती है।
खाटू श्याम मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण फाल्गुन मेला है, जो फरवरी-मार्च में आयोजित होता है। इस दौरान देश भर से लाखों श्रद्धालु रींगस से खाटू तक पैदल यात्रा करते हैं और निशान यात्रा में शामिल होकर भक्ति का अनोखा अनुभव प्राप्त करते हैं। भजन, कीर्तन, ढोल-नगाड़ों और रंग-बिरंगे ध्वजों की शोभा देखकर वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
मंदिर के आसपास कई महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थल भी मौजूद हैं, जिनमें जीण माता मंदिर, वीर हनुमान मंदिर, सालासर बालाजी, लक्ष्मणगढ़ किला, और मनोरंजन प्रेमियों के लिए गोल्डन वाटर पार्क शामिल हैं।
खाटू श्याम मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और स्थापत्य विरासत का अद्भुत प्रतीक है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु भक्ति, इतिहास और शांति का अनूठा अनुभव लेकर यहाँ से जाते हैं।













