मध्य एशिया में भारत की नई कूटनीतिक पहल, मोदी के उज्बेकिस्तान-किर्गिस्तान दौरे पर दुनिया की नजर
एससीओ शिखर सम्मेलन में आतंकवाद, सुरक्षा और कनेक्टिविटी पर भारत रखेगा अपना पक्ष

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को तीन दिवसीय उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान दौरे के लिए रवाना हो गए। प्रधानमंत्री की इस यात्रा को मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। दौरे के दौरान मोदी 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ कई देशों के नेताओं से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
यात्रा के पहले चरण में प्रधानमंत्री उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचेंगे। यहां उनकी राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत होगी। दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देने के साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। मोदी ताशकंद स्थित शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी सेंटर का भी दौरा करेंगे।
इसके बाद प्रधानमंत्री किर्गिस्तान की राजधानी बिष्केक जाएंगे, जहां एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। सम्मेलन एससीओ की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी महत्वपूर्ण है। भारत वर्ष 2017 से संगठन का पूर्ण सदस्य है।
एससीओ बैठक के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने के साथ कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग पर भारत अपना पक्ष रखेगा। प्रधानमंत्री मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत अन्य नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें भी प्रस्तावित हैं। वे छठे विश्व नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा है कि भारत शांति, स्थिरता और समृद्धि के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका यह दौरा मध्य एशिया के साथ भारत के संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।













