नेपाल ने बदला रुख, भारत समेत चार देशों के विशेषज्ञों को रेस्क्यू की मंजूरी
भोटेकोशी बाढ़ के बाद बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव, सुरंगों में तलाश से लेकर डीएनए और फोरेंसिक जांच में मिलेगी मदद

नई दिल्ली/काठमांडू। नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भीषण बाढ़ के बाद सरकार ने राहत और बचाव अभियान में विदेशी विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है। पहले नेपाल ने स्पष्ट किया था कि खोज और राहत अभियान केवल नेपाली बचाव दल संचालित करेंगे, लेकिन बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के लापता होने के बाद सरकार ने अपना रुख बदल दिया है।
अब भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञों को सीमित संख्या में नेपाल आने की अनुमति दी गई है। ये टीमें नेपाली बचाव दल के साथ मिलकर सुरंगों और दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों की तलाश, शवों की पहचान, डीएनए परीक्षण और फोरेंसिक जांच में तकनीकी सहायता देंगी।
31 देशों के 517 विदेशी नागरिक लापता
रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ की इस त्रासदी में 550 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 977 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 31 देशों के 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक लापता विदेशी नागरिकों में 178 भारतीय सबसे अधिक हैं। इसके अलावा 65 अमेरिकी, 53 यूक्रेनी, 35 ऑस्ट्रेलियाई और 33 ब्रिटिश नागरिकों के लापता होने की जानकारी है।
भारत ने पहले ही बढ़ाया मदद का हाथ
भारत ने नेपाल को राहत और बचाव कार्यों में हरसंभव सहायता देने की पेशकश की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार भारत ने सुरंग बचाव दल, मेडिकल टीम और अन्य विशेषज्ञ भेजने का प्रस्ताव दिया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी नेपाल के विदेश मंत्री से बातचीत कर सहायता का भरोसा दिलाया है।
नेपाल सरकार का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच लिया गया है। अब विदेशी विशेषज्ञ नेपाली एजेंसियों के साथ समन्वय कर लापता लोगों की तलाश और मृतकों की पहचान के अभियान को गति देंगे।













